By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 03, 2026
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि राज्य के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता तत्काल जारी की जाए। खरगे ने प्रधानमंत्री को एक अक्टूबर को लिखे गए पत्र की प्रति शनिवार को ‘एक्स’ पर साझा की और कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह को भी इस तरह का पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने पत्र में कहा कि कर्नाटक इस समय भीषण सूखे की चपेट में है और यह पिछले 150 वर्षों में राज्य में आया सबसे भयावह सूखा साबित हो सकता है।
उनका कहना है कि राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान दूसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। खरगे के अनुसार, 19.52 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान का आकलन किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 18,748.23 करोड़ रुपये है। राज्य सरकार ने सूखे से कुल आर्थिक नुकसान करीब 40,000 करोड़ रुपये आंका है।
खरगे ने कहा कि 31 लाख से अधिक किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। 709 गांवों और 114 शहरी वार्डों में टैंकरों के जरिए पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 18 तालुकों में चारे का भंडार 20 सप्ताह से भी कम समय के लिए बचा है। खरगे ने प्रधानमंत्री से छह प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है।
इनमें कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में सूखे से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्रीय दल भेजना और राज्य द्वारा मांगी गई 3,705.30 करोड़ रुपये की पूरी सहायता जारी करना शामिल है। उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों के लिए लागत पर रियायत की गणना कर्नाटक के अद्यतन ‘भूमि’ भू-अभिलेखों के आधार पर करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 की कृषि जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर सहायता दिए जाने से पात्र किसान लाभ से वंचित हो सकते हैं।
खरगे ने सूखे की स्थिति का आकलन किए जा रहे 11 अतिरिक्त तालुकों और भविष्य में पात्र पाए जाने वाले अन्य तालुकों को भी इसी केंद्रीय सहायता के दायरे में शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कावेरी और जलविद्युत क्षेत्रों में जलाशयों के कम जलस्तर का हवाला देते हुए पेयजल सुरक्षा तथा वैकल्पिक बिजली की लागत के लिए अतिरिक्त सहायता देने की मांग की। खरगे ने कहा कि कर्नाटक को सहायता राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना, नुकसान और जरूरत के आधार पर तत्काल दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सूखा राहत एक मानवीय आवश्यकता है और केंद्र तथा राज्य के बीच राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।