ममता बनर्जी का अदालतों से फटकार खाने का रिकार्ड

By योगेंद्र योगी | Apr 25, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने एक अनूठा रिकार्ड बनाया है। यह रिकार्ड है, अदालतों से फटकार खाने का। देश में शायद ही किसी राज्य की ऐसी सरकार होगी, जिसने अदालतों से ममता सरकार की जितनी डांट खाई होगी। आश्चर्य की बात यह है कि दर्जनों मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से लताड़ खाने के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तेवरों में कोई अंतर नहीं आया है। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं से टकराने का ममता का रवैया ऐसा है मानों पश्चिम बंगाल भारत का नहीं बल्कि पाकिस्तान का हिस्सा हो। 

केंद्र की भाजपा सरकार किसी सरकारी योजना का चुनावी फायदा नही उठा ले, इसी मंशा से ममता सरकार ने कोलकाता मेट्रो प्रोजेक्ट में रोड़े अटकाने में कसर बाकी नहीं रखी, आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की झाड़ खाने के बाद ममता सरकार परियोजना से बाधाओं को हटाने के लिए मजबूर हुई।

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सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना के एक गलियारे के निर्माण में रोड़े अटकाने को लेकर ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने बंगाल सरकार की याचिका खारिज करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट को परियोजना की निगरानी करने का निर्देश दिया था। पीठ ने यह भी कहा, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार प्रति काफी उदारता दिखाई है। शीर्ष अदालत ने गहरी नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया कि यह ऐसा मामला था, जिसमें आपके मुख्य सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तमाम संवैधानिक हदें लांघते हुए ऐसा काम किया, जिसे आजाद भारत के इतिहास में कोई मुख्यमंत्री करने का दुस्साहस नहीं कर सका। ईडी ने राजनीतिक रणनीति बनाने वाली मशहूर फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के बीच में ही  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां मौजूद एक फाइल अपने साथ ले गईं। इस मुद्दे ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सख्त टिप्पणी की। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कहा कि किसी मुख्यमंत्री को जबरन उस जगह में घुसते देखना सुखद नहीं है, जहां केंद्रीय जांच एजेंसी जांच कर रही है। कोर्ट ने कहा कि एजेंसी की जांच में दखल नहीं दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब राज्य सरकार को सिलेक्शन में गड़बड़ी का पता चल चुका था, तो शिक्षकों की अतिरिक्त पद पर नियुक्ति क्यों की गई। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने बंगाल सरकार से पूछा-अतिरिक्त पद बनाने का उद्देश्य क्या था। गड़बड़ी का पता लगने के बावजूद आपने दागी उम्मीदवारों को बाहर क्यों नहीं किया। दाल में कुछ काला है या सब कुछ काला है। पश्चिम बंगाल के स्कूल सेवा आयोग में शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी के  मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी और एसएससी के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। पेशे से मॉडल अर्पिता के घर से 49 करोड़ कैश और करोड़ों की ज्वेलरी मिली थी।

साल 2024 में संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण और जमीन हथियाने व राशन घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसी शख्स को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की अर्जी को खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपित शाहजहां शेख काफी प्रभावी व्यक्ति हैं और उसका सत्ताधारी दल से संबंध है। राज्य की पुलिस ने उसे बचाने के लिए लुका-छिपी का खेल खेला। 

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के रेप और मर्डर केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर से लेकर पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को दूसरे कॉलेज में नियुक्त किए जाने तक अपनी नाराजगी जताई। इसके साथ ही सीबीआई और बंगाल सरकार से जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा था। कोर्ट ने ये भी पूछा कि क्या प्रिंसिपल ने हत्या को आत्महत्या बताया? सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर सवाल किए थे।

11 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म "भविष्येर भूत" पर प्रतिबंध के मामले में ममता सरकार को फटकार लगाते हुए 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कहा कि वे 20 लाख रुपये बांग्ला फिल्म निर्देशक अनिक दत्त और सिनेमा हॉल के मालिकों को दें। दरसअल पश्चिम बंगाल में भविष्येर भूत पर बिना वजह प्रतिबंध को लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। गौरतलब है कि इस फिल्म में कथित तौर पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल काग्रेस समेत अन्य राजनीतिक पार्टियों पर कटाक्ष किया गया था। इसी वजह से फिल्म रिलीज होने के एक दिन बाद इसे राज्य भर के सभी सिनेमा हॉल से हटा दिया गया था। 

अदालतों की इन तमाम नजीरों से साबित होता है कि ममता बनर्जी मनमाने तरीके से शासन चलाने की आदी हैं। देश में दूसरे राज्यों में भी गैरभाजपा दलों की सरकारें हैं, किन्तु उनका रवैया पश्चिम बंगाल सरकार जैसा नहीं है, जिन्हें बार—बार  संवैधानिक संस्थाओं से टकराव को लेकर अदालतों की फटकार खानी पड़ती हो। हालांकि विपक्षी दलों की सरकारों की राज्यपाल और दूसरे मुद्दों पर केंद्र सरकार से तनातनी रही है, किन्तु बात—बात पर अदालतों तक जाने की नौबत नहीं आई। देश और राज्यों के लोकतंत्र का तकाजा यही है कि ममता बनर्जी को अदालतों के निर्णय और निर्देशों से सीखने की जरूरत है।

- योगेन्द्र योगी

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