बांग्लादेश मामले में कूटनीति व राजनीति पर एक कदम आगे निकली ममता बनर्जी

By जगदीश यादव | Dec 14, 2024

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केंद्र की भाजपा नीत सरकार के द्वारा अल्पसंख्यकों को लेकर तुष्टीकरण से लेकर बंगाल में बांग्लादेशियों को शरण देने का आरोप लगाया जाता रहा है। लेकिन इन दिनों बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं और मीडिया में उक्त खबरें हर रोज आ रही है। ऐसे में भले ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी का उक्त मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है लेकिन ममता बनर्जी ने सशक्त तौर पर इस अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को उठाया है और बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार को नाकाम तक करार दिया है। ममता बनर्जी ने बांग्लादेश से उपजे एक बयान का जवाब देते हुए साफ कहा कि, अगर वह लोग बिहार, बंगाल ओडिशा जैसे हमारे देश के राज्यों पर कब्जे की बात करेंगे तो वह बैठकर लॉलीपॉप नहीं चूसेगी। साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बात कही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज राज्य विधानसभा में कहा कि, बांग्लादेश के हालात पर यूएन हस्तक्षेप करे और वहां विशेष शांति सेना भेजे। 

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ममता बनर्जी जब सांसद थी तब भी बंगाल में वाममोर्चा के शासन के दौरान बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठा चुकी है। लेकिन ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद भी बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठता रहा है। वैसे देखा जाए तो भाजपा के केन्द्रीय नेताओं के मुकाबले में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार के मामले पर बंगाल भाजपा के नेता भी लगभग मौन ही है। लेकिन बंगाल में नेता प्रतिपक्ष व भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी जोरदार तौर पर उक्त मामले पर विरोध व्यक्त कर रहें हैं और बांग्लादेश को चेता भी रहे है। हलांकि अब जाकर बांग्लादेश ने यह माना कि शेख हसीना सरकार के अपदस्थ होने के बाद देश में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं पर हिंसा की 88 घटनाएं हुई हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि, इन घटनाओं में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पांच अगस्त से 22 अक्टूबर के दौरान अल्पसंख्यकों से संबंधित घटनाओं को लेकर कुल 88 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि मामलें और गिरफ्तारियां और बढ़ सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में हिंसा की नई घटनाएं सामने आई हैं। देखा जाए तो दरअसल, बांग्लादेश में हो रहे अल्पसंख्य हिन्दू उत्पीड़न कोई नई बात नहीं हैं। वहां कोई भी सरकार हो निशाने पर हिन्दू महेशा रहे है। 

बात बांग्लादेश में तत्कालीन घटना की करें तो इस्कॉन के संन्यासी चिन्मय कृष्ण दास के गिरफ्तारी से शुरु हुई। पहले इन्हें राष्ट्रद्रोह के आरोप मे फिर इनके सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है। यहां तक कि जेल में इन साधुओं को बाहर से भोजन उपलब्ध कराने के नाते भी गिरफ्तारियां हुई है, क्योंकि अपने भोजन संबंधित नियमों के नाते ये कुछ भी और कही का भी खाना नहीं खा सकते हैं। फिर जब हिन्दू समाज ने विरोध शुरु किया तो उनके उपर हमलें शुरु हो गए और हिंदू समुदाय को आज वहां यातना झेलनी पड़ रही है। बहरहाल दो देशों को सामने रख कर अगर सरल शब्दों में राजनीति व कूटनीति की बात करे तो कहा जा सकता है कि राजनीति में कब क्या बदल जाए कोई कह नहीं सकता। यहां कुछ भी दावे के साथ स्थायी नहीं होता है। लेकिन कूटनीति की बात करे तो कहा जा सकता है कि जब बात देश व उससे जुड़े लोग और मुद्दों की बात हो तो वहां राजनीति नहीं की जा सकती बरन वहां कूटनीति ज्यादतर कारगर होती है। देखा जाए तो उपरोक्त मुद्दे पर ममता बनर्जी एक कदम आगे निकली दिख रहीं है। 

- जगदीश यादव

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)। 

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