By अभिनय आकाश | Mar 09, 2026
पश्चिम बंगाल की सियासत में सम्मान और अपमान की एक नई जंग छिड़ गई है। मुद्दा है देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोटोकॉल। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल सरकार पर राष्ट्रपति के घोर अपमान का आरोप लगाया तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर दिखाकर प्रधानमंत्री पर ही पलटवार कर दिया। ममता बनर्जी ने तस्वीर को सबूत बताते हुए दावा किया प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पद का सम्मान करने के बड़े-बड़े दावे करती रहती हैं। आइए इस तस्वीर को गौर से देखें। देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति खड़ी हैं, जबकि प्रधानमंत्री आराम से अपनी कुर्सी पर बैठे हैं। राष्ट्रपति के प्रति सम्मान के सभी दावे खोखले लगते हैं जब प्रत्यक्ष प्रमाण उनके पद के प्रति इस तरह की लापरवाही को दर्शाता है। वीडियो में तृणमूल के दो नेता राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की 2024 की एक तस्वीर पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर 31 मार्च, 2024 को खींची गई थी, जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने आडवाणी से मुलाकात की थी और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था।
तस्वीर में पीएम मोदी भाजपा नेता एल के आडवाणी के साथ बैठे नजर आ रहे हैं और राष्ट्रपति उनके बगल में खड़ी हैं। ममता ने इसे सबूत बताते हुए पूछा कि कौन किसका अपमान कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पद का सम्मान करती हैं। लेकिन बंगाल को बार-बार निशाना बनाना बंद होना चाहिए। ममता ने यह भी कहा कि सिलीगुड़ी का कार्यक्रम एक निजी संस्था का था और राज्य सरकार को इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं थी। ममता बनर्जी ने अपनी अनुपस्थिति का बचाव करते हुए यह भी कहा कि वह जनता के मताधिकार के लिए धरने पर बैठी हैं और किसी निजी कार्यक्रम के लिए धरना छोड़ना मुमकिन नहीं था। उन्होंने एयरपोर्ट अथॉरिटी और निजी आयोजकों को जिम्मेदार ठहराते हुए यह तक कह दिया था कि अगर कोई 50 बार आए तो हर बार शामिल होना भी संभव नहीं होता।