पश्चिम बंगाल के चौथे चरण के चुनाव में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

By संतोष पाठक | Apr 27, 2019

चौथे चरण के तहत पश्चिम बंगाल की 8 लोकसभा सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है। इन सीटों पर कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। ममता बनर्जी 2014 में जीती सीटों की गिनती बरकरार रखते हुए बीजेपी, कांग्रेस और लेफ्ट की सीटों में भी सेंध लगाना चाहती है। वहीं कांग्रेस और लेफ्ट अपनी कोई जमीन को फिर से वापस पाने के लिए लड़ रहे हैं। जबकि बीजेपी ने चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह समेत तमाम दिगग्ज नेताओं को उतारकर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश में लगातार मतों का प्रतिशत बढ़ने से उत्साहित बीजेपी इस बार राज्य में ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटें जीतना चाहती है।

1. आसनसोल– पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल सीट कही जाने वाली आसनसोल पर दो फिल्मी हस्तियों का सीधा मुकाबला है। बीजेपी ने यहां से अपने वर्तमान सांसद और केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर दांव लगाया है तो वहीं ममता बनर्जी ने यहां से फिल्मी अदाकारा मुनमुन सेन को चुनावी मैदान में उतारा है। मुनमुन सेन टीएमसी के टिकट पर ही 2014 में बांकुरा से लोकसभा का चुनाव जीती थी लेकिन इस बार ममता बनर्जी ने उन्हे बाबुल सुप्रियो के खिलाफ ही मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस की तरफ से बिस्वरूप मंडल तो सीपीएम की तरफ से गौरंगा चटर्जी भी मुकाबले में आने की कोशिश कर रहें है।

2. बहरामपुर– लोकसभा सीट से कांग्रेस ने एक बार फिर से अपने दबंग सांसद अधीर रंजन चौधरी को ही मैदान में उतारा है। इस सीट से लगातार 4 बार चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के इस दबंग नेता का मुकाबला करने के लिए बीजेपी ने कृष्ण जुआरदार आर्य को तो वहीं टीएमसी ने अपूर्बा सरकार को चुनावी मैदान में उतारा है। लेफ्ट फ्रंट की तरफ से आरएसपी के आईडी मौहम्मद चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे तो यहां कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट के बीच ही सीधा मुकाबला होता रहा है लेकिन आक्रामक चुनाव प्रचार के जरिए बीजेपी भी इस सीट पर काफी मेहनत कर रही है। 

3. कृष्णानगर– लोकसभा सीट को किसी जमान में माकपा का गढ़ माना जाता था। एक बार बीजेपी भी यहां जीत का परचम लहरा चुकी है। टीएमसी ने यहां से अपने वर्तमान सांसद तपस पॉल का टिकट काटकर महुआ मोइत्रा को चुनावी मैदान में उतारा है। सीपीएम की तरफ से झा शांतनु इस गढ़ को दोबारा जीतने की कोशिश कर रहे हैं वहीं बीजेपी ने यहा से कल्याण चौबे को उम्मीदवार बनाया है। इंताज अली शाह कांग्रेस की तरफ से चुनावी मैदान में है। 

4. राणाघाट– संसदीय क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2008 के परिसीमन के बाद इस सीट पर 2009 में पहली बार चुनाव हुआ। चैतन्य महाप्रभु की जन्मभूमि वाले इस सीट पर 2009 और 2014 में टीएमसी को जीत हासिल हुई। टीएमसी ने यहां से वर्तमान सांसद तापस मंडल का टिकट काटकर रुपाली बिस्वास को मैदान में उतारा है। बीजेपी की तरफ से डॉ मुकुट मणि अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं तो कांग्रेस ने मिनती बिस्वास को चुनावी मैदान में उतारा है। 

5. बीरभूम– वीर राजाओं के शासन के कारण इस क्षेत्र का नाम वीरो की भूमि यानी बीरभूम पड़ गया। 2009 में इस सीट को सामान्य सीट में बदल दिया गया। 2009 और 2014 के चुनाव में यहां से ममता बनर्जी की पार्टी को जीत हासिल हुई थी। टीएमसी ने यहां से अपने वर्तमान सांसद फिल्म अभिनेत्री शताब्दी राय को मैदान में उतारा है । बीजपी ने यहां से दूध कुमार मंडल और कांग्रेस ने इमाम हुसैन को चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर वैसे तो सीधा मुकाबला सीपीएम और टीएमसी के बीच होता रहा है लेकिन बीजेपी इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगी हुई है। 

6. बर्धमान ईस्ट– लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। टीएमसी ने यहां से अपने वर्तमान सांसद सुनील कुमार मंडल को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। सीपीएम ने 2014 में कड़ी टक्कर देने वाले ईश्वर चन्द्र दास फिर से टिकट दिया है जबकि बीजेपी की तरफ से परेश चन्द्र दास और कांग्रेस की तरफ से सिद्धार्थ मजूमदार चुनाव लड़ रहे हैं। लगातार बढ़ रहे वोट प्रतिशत के हिसाब से बीजेपी ने यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। 

7. बर्धमान दुर्गापुर– लोकसभा सीट से टीएमसी ने एक बार फिर से अपने वर्तमान सांसद डॉक्टर ममताज संघमिता को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं सीपीएम ने अभास राय चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से रंजीत मुखर्जी चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी ने केन्द्रीय मंत्री एस एस अहलूवालिया को उनकी वर्तमान सीट दार्जीलिंग से हटाकर यहां से चुनावी मैदान में उतारा है। वैसे तो यहां आमतौर पर सीपीएम और टीएमसी के बीच ही सीधा मुकाबला होता रहा है लेकिन आंकड़े यह भी बताते है कि इस सीट पर बीजेपी का वोट लगातार बढ रहा है और अहलूवालिया जैसे बड़े नेता को मैदान में उतारकर बीजेपी ने इस लड़ाई को त्रिकोणीय तो बना ही दिया है। 

8. बोलपुर– रबीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारतीय विश्वविद्यालय के कारण दुनियाभर में मशहूर बोलपुर संसदीय क्षेत्र से सीपीएम के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी 5 बार सांसद चुने गए थे। सोमनाथ दादा के बाद भी यह सीट सीपीएम ही जीतती रही लेकिन 2014 में उलटफेर करते हुए टीएमसी के अनुपम हाजरा ने यह सीट लेफ्ट से छीन ली। अनुमप हाजरा के बीजेपी में शामिल होने की वजह से इस बार टीएमसी ने यहां से असित कुमार मल को चुनावी मैदान में उतारा है। बीजेपी की तरफ से राम प्रसाद दास और कांग्रेस की तरफ से अभिजीत साहा चुनाव लड़ रहे हैं। 

- संतोष पाठक

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