Prajatantra: मनमोहन सिंह का 18 साल पुराना भाषण बना मोदी का चुनावी हथियार, कांग्रेस ने लगाया झूठ का आरोप

By अंकित सिंह | Apr 22, 2024

राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषण में मुसलमानों के संदर्भ पर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी गुट इंडिया के नेताओं ने भाषण को "वास्तविक मुद्दों" से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है। भाषण में पीएम मोदी दिसंबर 2006 में सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की एक टिप्पणी की ओर इशारा कर रहे थे। तब भी एक बड़ा विवाद छिड़ गया था, जिसके बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री के कार्यालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसे उन्होंने "जानबूझकर और शरारती गलत व्याख्या" कहा था। हालांकि, एक बार फिर से मनमोहन सिंह का बयान सियासी मुद्दा बन गया है। 

विपक्ष का पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने डॉ. सिंह पर पीएम मोदी के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री अब मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले चरण के मतदान में निराशा हाथ लगने के बाद नरेंद्र मोदी के झूठ का स्तर इतना गिर गया है कि घबरा कर वह अब जनता को मुद्दों से भटकाना चाहते हैं। कांग्रेस के ‘क्रांतिकारी मेनिफेस्टो’ को मिल रहे अपार समर्थन के रुझान आने शुरू हो गए हैं। देश अब अपने मुद्दों पर वोट करेगा, अपने रोज़गार, अपने परिवार और अपने भविष्य के लिए वोट करेगा। भारत भटकेगा नहीं! समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोलते हैं, जिस तरह से उन्होंने कांग्रेस के 'न्याय पत्र' और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बारे में झूठ फैलाया, वह गंदी राजनीति का उदाहरण है।' कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि PM मोदी ने आज फिर झूठ बोला। वे देश को हिंदू-मुसलमान के नाम पर झूठ परोसकर बांट रहे हैं। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि PM मोदी लोगों को झूठे और गैर-जरूरी मुद्दों में उलझा रहे हैं। लेकिन आज उन्होंने 'मंगलसूत्र’ पर बयान देकर सारी सीमाएं लांघ दी हैं।

मनमोहन सिंह ने क्या कहा था

तब विवाद बढ़ने पर तत्कालीन प्रधान मंत्री के कार्यालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें सिंह के बयान को बताया गया था। इसमें कहा गया था कि मेरा मानना ​​है कि हमारी सामूहिक प्राथमिकताएँ स्पष्ट हैं: ग्रामीण बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश, और सामान्य बुनियादी ढांचे की आवश्यक सार्वजनिक निवेश आवश्यकताओं के साथ-साथ एससी/एसटी, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए कार्यक्रम। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए घटक योजनाओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता होगी। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए नवीन योजनाएँ बनानी होंगी कि अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को विकास के लाभों में समान रूप से साझा करने का अधिकार मिले। संसाधनों पर पहला दावा उनका होना चाहिए। केंद्र के पास अनगिनत अन्य जिम्मेदारियां हैं जिनकी मांगों को समग्र संसाधन उपलब्धता के अनुरूप बनाना होगा पीएमओ ने कहा था कि उपरोक्त से यह देखा जा सकता है कि प्रधान मंत्री का "संसाधनों पर पहला दावा" का संदर्भ ऊपर सूचीबद्ध सभी "प्राथमिकता" क्षेत्रों को संदर्भित करता है, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाओं और बच्चों और अल्पसंख्यकों का उत्थान के कार्यक्रम शामिल हैं। 

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‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण’ को रही कोशिश

चुनावी मौसम में ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण का जिक्र खूब होता है। मोदी के इस बयान के बाद माहौल कुछ ऐसा ही सेट होता दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां पीएम मोदी के इस बयान के बाद भाजपा ने साफ कर दिया कि वह कहीं ना कहीं हिंदू वोटो को लामबंद करने की कोशिश कर रही है। तो दूसरी ओर कांग्रेस के पास ध्रुवीकरण की कोशिश करने का आरोप लगाने के अलावा कुछ बचा नहीं है। कांग्रेस मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है। लेकिन भाजपा ने एक वीडियो शेयर करके यह भी बता दिया कि मनमोहन सिंह ने उस वक्त क्या कहा था। भाजपा ने साफ तौर पर पूछा कि क्या कांग्रेस को मनमोहन सिंह पर विश्वास नहीं है?

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