By Renu Tiwari | Sep 17, 2025
बॉलीवुड अभिनेता मनोज वाजपेयी इस बात से निराश नहीं हैं कि फिल्म ‘‘जोरम’’ और ‘‘सिर्फ एक बंदा काफी है’’ में उनके दो सबसे प्रशंसित प्रदर्शनों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में खासी सराहना नहीं मिली। अभिनेता का कहना है कि वह जो काम करते हैं, उसके लिए कोई उम्मीद नही रखते हैं। चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वाजपेयी ने ‘‘जोरम’’ में फरार आदिवासी व्यक्ति दसरू की आकर्षक भूमिका के लिए फिल्म समीक्षकों के साथ ही प्रशंसकों से सराहना मिली।
उन्होंने पीटीआई-से कहा, ‘‘एक बात जो कभी नहीं भूली जाएगी, वह यह है कि ‘‘जोरम’’ एक बेहतरीन फिल्म है, जिसे सभी स्वीकार करेंगे, यह एक ऐसा अभिनय है जिसे मैं देखना पसंद करूंगा। जब मैं इसे देखता हूं, तो मुझे लगता है कि यह मैं नहीं हूं। यही वह एहसास है जिसके लिए कोई जीता है, और ऐसा करने के लिए किसी ने बहुत खून-पसीना बहाया है।’’ अभिनेता ने कहा कि कई पुरस्कार समारोहों ने अपना नजरिया बदल दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन वे ऐसा ही चाहते हैं, मुझे कोई शिकायत नहीं है। मैं कौन होता हूं इसकी शिकायत करने वाला? ये उनका पुरस्कार है, ये उनका फैसला है।