By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 02, 2026
(फाइल फोटो के साथ) जालना (महाराष्ट्र), दो सितंबर मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे की भूख हड़ताल बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रही। इस बीच, चिकित्सकों ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और जालना की जिलाधिकारी ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। जरांगे के स्वास्थ्य मानकों की जांच करने वाले एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उनके रक्त शर्करा का स्तर गिर गया है।
इसके अलावा भी उन्होंने कई अन्य मांगें रखी हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे मुंबई तक ले जाया जाएगा। जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने मंगलवार रात जरांगे से प्रदर्शन स्थल पर मुलाकात की।
यह मुलाकात उन्हें अनशन खत्म करने के लिए राजी करने की राज्य सरकार की कोशिशों के तहत हुई। बैठक के दौरान मित्तल ने मराठा आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जरांगे ने हालांकि सवाल किया कि क्या वह सरकार का पक्ष रखने आई हैं।
उन्होंने मित्तल से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी मांगों से जुड़े फैसले राज्य स्तर पर लिए जाने हैं। जरांगे ने मित्तल से कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने मित्तल से यह भी कहा कि आंदोलन के सिलसिले में वह दोबारा उनसे मिलने न आएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेवजह उन्हें उनके साथ बातचीत करने के लिए भेज रही है। जरांगे ने दावा किया है कि मराठाओं और कुनबियों के बीच वंशावली संबंध स्थापित करने वाले 58 लाख रिकॉर्ड मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस संख्या को कम करने की कोशिश कर रही है।
उनकी प्रमुख मांग है कि मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए और शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उन्हें भी दिया जाए। पिछले साल 29 अगस्त को आजाद मैदान में जरांगे के विरोध-प्रदर्शन के कारण यातायात अवरुद्ध हो गया था। राज्य सरकार द्वारा आठ में से छह मांगें मान लेने और कुनबी जाति प्रमाण-पत्र जारी करना शुरू करने के बाद दो सितंबर को यह प्रदर्शन वापस ले लिया गया था।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि सरकार संवैधानिक रूप से वैध और कानूनी तौर पर व्यावहारिक मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन ऐसी मांगों पर नहीं जो उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करती हों। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा था कि ‘महायुति’ सरकार किसी अन्य वर्ग के साथ अन्याय किए बिना मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिंदे ने कहा था कि कानून के दायरे में जो भी उचित और न्यायसंगत होगा,सरकार उसे उपलब्ध कराने के लिए सकारात्मक रुख रखती है।
उन्होंने जरांगे से ‘‘रचनात्मक रुख’’ अपनाने की अपील की।