Manusmriti विवाद: Mallikarjun Kharge के बयान के बाद फिर चर्चा में आया यह ग्रंथ

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026

मनुस्मृति, जिसे आधिकारिक तौर पर मानव-धर्म-शास्त्र के नाम से जाना जाता है, एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है। इसका रचनाकाल दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच माना जाता है। यह ग्रंथ भारतीय समाज में अक्सर राजनीतिक बहसों और विवादों का विषय बनता रहा है।

विवाद का इतिहास

मनुस्मृति अपने सामाजिक विचारों, विशेषकर जाति व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर दिए गए निर्देशों के कारण लंबे समय से आलोचना का शिकार होती रही है। कई समाज सुधारकों और विद्वानों ने इसे लैंगिक असमानता और सामाजिक भेदभाव का आधार माना है। भारत में, विशेष रूप से बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं ने मनुस्मृति की कड़ी आलोचना की और इसे जलाने का आह्वान भी किया था।

राजनीतिक बहस का केंद्र

हाल ही में, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने का विरोध किया, जिसके बाद यह मुद्दा फिर से गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खरगे के बयान पर आपत्ति जताई है। यह विवाद दर्शाता है कि प्राचीन ग्रंथ आज भी भारतीय राजनीति और समाज में कितनी प्रासंगिकता रखते हैं और कैसे उन पर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने विचार रखते हैं।

विभिन्न दृष्टिकोण

जहां कुछ लोग मनुस्मृति को भारतीय संस्कृति और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं, वहीं अन्य इसे प्रतिगामी और अन्यायपूर्ण मानते हैं। यह ग्रंथ विभिन्न व्याख्याओं और दृष्टिकोणों के कारण लगातार चर्चा और बहस का विषय बना रहता है।

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