By राजीव शर्मा | Mar 16, 2022
मेरठ,किसान आंदोलन और एसपी-आरएलडी गठबंधन से खड़ी हुई सियासी मुश्किल को पार कर कमल खिलाने वाले वेस्ट यूपी के विधायकों में से कई के योगी का वजीर बनना तय माना जा रहा है। योगी 2.0 मंत्रिमंडल में कौन शामिल होगा, इसके लिए नाम पर अंतिम मुहर पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दिल्ली के दरबार में लग चुकी हैं। बीजेपी के सभी जीते विधायक हाईकमान का भरोसा जीतने की जुगत में शिद्दत से जुटे हैं। इस बार वेस्ट यूपी को खास तवज्जो मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मेरठ से हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक दलित कोटे से फिर मंत्री बनने वालों की कतार में मजबूत माने जा रहे हैं। हालांकि कई दूसरे दलित चेहरे भी आस लगाए हुए हैं। गुर्जर कोटे में मौजूदा मंत्री बिजनौर के अशोक कटारिया के साथ मेरठ दक्षिण सीट से दोबारा जीते सोमेंद्र तोमर, लोनी से नंद किशोर, सहारनपुर से मुकेश चौधरी और गौतमबुद्ध नगर जिले से तेजपाल नागर की किस्मत खुल सकती है। बुलंदशहर में सभी सात सीटों और हापुड़ जिले में तीनों सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया है।
गाजियाबाद जिले से मोदीनगर की विधायक डॉ. मंजू सिवाच भी दौड़ में हैं। इसके साथ वेस्ट में अमरोहा के चेतन चौहान और मुजफ्फरनगर के विजय कश्यप के कोरोना से निधन के बाद पार्टी दो नए चेहरों को मंत्रिमंडल में लेगी। वेस्ट से एक ओबीसी, एक ठाकुर और एक गुर्जर चेहरा को मंत्री बना सकती है। ठाकुर समाज से नोएडा से पंकज सिंह, जेवर के धीरेंद्र सिंह को दोबारा विधायक बनने पर और बुलंदशहर की सिकंदराबाद सीट से बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के दामाद राहुल यादव को हराने वाले लक्ष्मी राज सिंह में किसी एक को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है।
ब्राह्मण कोटे से बुलंदशहर से मौजूदा मंत्री अनिल शर्मा, सूबे में रेकॉर्ड वोटों से दूसरी बार जीतने वाले साहिबाबाद सीट से सुनील शर्मा, बुलंदशहर की अनूप शहर सीट से दोबारा जीते संजय शर्मा के साथ बीजेपी की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मेरठ से कई बार विधायक रहे लक्ष्मीकांत वाजपेयी को मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है। जाट चेहरों में आरएलडी के गढ़ बागपत में दूसरी बार कमल खिलाने वाले योगेश धामा, केपी मलिक और मौजूदा मंत्री भूपेंद्र सिंह में से किसी एक को वजीर बनाने की उम्मीद हैं। हापुड़ से भी धर्मपाल आढ़ती धर्मेश तोमर की किस्मत जोर मार सकती हैं। शामली जिले की तीनों सीटें बीजेपी हारी है। उनके गन्ना मंत्री सीएम योगी के करीबी माने जाने वाले सुरेश राणा भी हार गए हैं। माना जा रहा है कि उनको भी बीजेपी सरकार में जगह मिल सकती है।