By अभिनय आकाश | Aug 04, 2026
जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है। जहाँ भारत का यह केंद्र-शासित प्रदेश आर्थिक विकास और बुनियादी ढाँचे के विस्तार का गवाह बन रहा है, वहीं PoJK आर्थिक तंगी, राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से जूझ रहा है। केंद्र-शासित प्रदेश के 2024-25 के वित्तीय मामलों पर 'कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल' (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ने पिछले पाँच वर्षों में लगातार आर्थिक प्रगति की है। केंद्र-शासित प्रदेश का 'ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट' (GSDP) 2020-21 में 1.68 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 2.62 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि इसी दौरान प्रति व्यक्ति आय 1.01 लाख रुपये से बढ़कर 1.55 लाख रुपये हो गई। रिपोर्ट में विकास कार्यों पर होने वाले खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि की बात कही गई है। आर्थिक सेवाओं पर खर्च 2020-21 में 14,842 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 23,257 करोड़ रुपये हो गया, जबकि सामाजिक सेवाओं पर खर्च 21,964 करोड़ रुपये से बढ़कर 28,234 करोड़ रुपये हो गया।
गरीबी भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। जहाँ आधिकारिक गरीबी दर 12.65 प्रतिशत है, वहीं लगातार आर्थिक दबावों के कारण ग्रामीण आबादी का लगभग 18.6 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे जाने के जोखिम का सामना कर रहा है।
बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने लोगों में व्यापक असंतोष को जन्म दिया है। यहाँ के निवासियों ने बिजली की बढ़ती दरों, खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों और जिसे वे खराब प्रशासन मानते हैं, उसके खिलाफ़ बार-बार विरोध-प्रदर्शन किए हैं।