By अभिनय आकाश | Sep 02, 2025
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने आज गुवाहाटी के होटल आरकेडी में एक खचाखच भरे प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए असम में सरकार की हालिया कार्रवाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये कदम न केवल अमानवीय हैं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन हैं। कई प्रभावित इलाकों के अपने दौरे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने अपनी आँखों से लोगों के चेहरों पर निराशा और लाचारी देखी। सबसे दर्दनाक बात सिर्फ़ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि अपमान है, एक पूरे समुदाय को 'मियाँ' और 'संदिग्ध' जैसे अपमानजनक शब्दों से पुकारा जा रहा है। मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया अगर कोई विदेशी यहाँ पाया जाता है, तो उसे निर्वासित कर दिया जाए। हमें अवैध प्रवासियों से कोई सहानुभूति नहीं है। लेकिन जिन भारतीय नागरिकों को बेदखल किया गया है, उनका पुनर्वास किया जाना चाहिए। जहाँ बेदखली अपरिहार्य है, वहाँ सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन बुनियादी मानवीय संवेदना के साथ किया जाना चाहिए।
नामघरों (सामुदायिक प्रार्थना स्थलों) को हुए नुकसान के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नामघर और मस्जिद, दोनों ही असम की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं: "असम हमेशा से शंकर देव और अज़ान फ़कीर जैसी विभूतियों द्वारा गढ़ी गई विविध परंपराओं का केंद्र रहा है। अगर नामघर को नुकसान पहुँचाया गया, तो मस्जिद भी सुरक्षित नहीं रहेगी। दोनों की सुरक्षा हमारी साझा ज़िम्मेदारी है।