दूसरे धर्म की लड़की का निकाह कराने वाले मौलाना होशियार हो जायें

By संजय सक्सेना | Aug 22, 2024

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गत दिवस धर्मांतरण से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए निकाह कराने वाले मौलाना को जमानत नहीं दिये जाने का जो फैसला सुनाया है, वह उन लोगों के लिये आंख खोलने वाला है, जो सामने नहीं आकर पीछे से लव जेहाद और धर्मांतरण को बढ़ावा देते और कानून की कमजोरियों का सहारा लेकर बच निकलते हैं।कोर्ट ने माना कि इस्लाम अपनाने का दबाव डालकर निकाह कराना प्रथम दृष्टया धर्मांतरण (मतांतरण) कराने का अपराध है। इस टिप्पणी के साथ हाई कार्ट ने निकाह कराने वाले मौलाना को जमानत पर रिहा करने की अर्जी खारिज कर दी। भले ही न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश एक खास केस (अंकुर विहार गाजियाबाद निवासी मौलाना मोहम्मद शाने आलम की अर्जी) पर दिया है, लेकिन इसका असर व्यापक होगा।

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संविधान सभी व्यक्तियों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी भी देता है, जो भारत की सामजिक सद्भाव और भावना को दर्शाता है। संविधान के अनुसार राज्य को कोई धर्म नहीं है। राज्य के समक्ष सभी धर्म समान हैं। किसी धर्म को दूसरे धर्म पर वरीयता नहीं दी जा सकती। हालांकि हाल के दिनों में ऐसे कई उदाहण सामने आए हैं, जहां भोले-भाले लोगों को गलतबयानी, बल अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित किया गया। यह मामला भी उसी तरह का लगता है। अधिनियम के अनुसार जबरन निकाह कराने के कारण याची धर्म परिवर्तित कराने वाला माना जाएगा और उसे जमानत नहीं दी जा सकती। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि लव जेहाद के खिलाफ योगी सरकार जो कानून लाई थी उसका प्रभाव दिखना शुरू हो गया है।

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