By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 06, 2021
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने सभी भारतीयों का डीएनए एक होने के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान को गले ना उतरने वाला बताते हुए सोमवार को कहा कि संघ द्वारा भाजपा को आंख बंद करके समर्थन दिए जाने की वजह से देश में सांप्रदायिकता का जहर फैल गया है। बसपा प्रमुख के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार देर रात तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता साक्षी दिवाकर ने बसपा प्रमुख के बयान पर कहा, बहन जी भाजपा को जनता ने जनादेश ही संकीर्णता, जातिवाद व भ्रष्टाचार की संस्कृति खत्म कर विकास व सुशासन स्थापित करने के लिए दिया है, यही कारण है कि भाजपा का जनाधार और उस पर जनता का विश्वास दोनों ही बढ़ रहा है।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि संघ प्रमुख ने गाजियाबाद में अपने बयान में बड़ी-बड़ी बातें तो कही हैं, मगर यह भी सही है कि संघ के सहयोग और समर्थन के बिना भाजपा का अस्तित्व कुछ भी नहीं है, फिर भी संघ अपनी कही गई बातों को भाजपा तथा उसकी सरकारों से लागू क्यों नहीं करवा पा रहा है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत में भले ही अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं लेकिन उन सभी का डीएनए एक ही है। उन्होंने यह भी कहा था कि जो लोग हिंदुत्व के नाम पर ‘मॉब लिंचिंग’ कर रहे हैं वे हिन्दू नहीं हैं। भाजपा प्रदेश मुख्यालय से जारी बयान के अनुसार पार्टी प्रवक्ता साक्षी दिवाकर ने कहा कि संघ (आरएसएस) एक राष्ट्रभक्त संगठन है जो राष्ट्र व समाज निर्माण के लिए अहर्निश भाव से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी पराजय झेल रही बसपा प्रमुख मायावती अपने सिमटते जनाधार से बौखलाई हुई हैं और जातिवादी सोच और तुष्टिकरण की नीतियों के जरिए सत्ता में आने का उनका मंसूबा अब कभी पूरा नहीं हो सकता है। साक्षी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार सबका साथ-सबका विश्वास की नीति पर काम करते हुए जन अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य कर रही है। उन्होंने कहा संकीर्णता की राजनीति का दंश इस प्रदेश ने सपा-बसपा की सरकारों में झेला है। साक्षी ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि आपकी कथनी और करनी का अंतर जगजाहिर है, इसलिए आपके कहे का भरोसा न आपकी पार्टी के भीतर किसी को है और न ही बाहर।