देश भर में धूमधाम से मनायी जाती है मेष संक्रांति, जानिए इसका महत्व

By प्रज्ञा पाण्डेय | Apr 13, 2020

बैसाखी, सतुआन और बिहू के नाम से मनाया जाने वाला मेष संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार नई फसल की पैदावर की खुशी में मनाया जाता है। तो आइए इस त्यौहार के अवसर पर हम आपको देश भर में मेष संक्रांति की विविधताओं के बारे में बताते हैं।

भारत में मेष संक्रांति के हैं अलग-अलग नाम 

पूरे भारत में मेष संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस दिन स्नान तथा दान को खास महत्व दिया जाता है। मेष संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा के साथ सत्तू और गुड़ खाया जाता है। इस दिन शिव, विष्णु और काली की भी पूजा का विधान है। 

मेष संक्रांति का महत्व

हिन्दू धर्म में मेष संक्रांति का खास महत्व होता है। मेष संक्रांति को मौसम में बदलाव, खेती और प्रकृति से जोड़ा जाता है। इस दिन सूर्य देवता की उपासना होती है। साथ ही मौसम के बदलाव से धरती अन्न पैदा कर रही है जिससे जीवन में खुशहाली आती है। इसलिए ऋतु-परिवर्तन तथा फसलों की भरमार होने पर यह त्यौहार मनाया जाता है। 

ऐसे करें मेष संक्रांति की पूजा 

संक्रांति का दिन इसे पूर्णिमा तथा एकादशी की तरह ही शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन आप खास पूजा कर अपने इष्ट देव को प्रसन्न कर आर्शीवाद पा सकते हैं। इस समय कोरोना संकट के कारण देश में लॉकडाउन है। इसलिए लॉकडाउन के दौरान आप घर में रहकर ईश्वर से तत्कालीन संकट से उबरने के लिए प्रार्थना करें। 

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कुछ लोग मेष संक्रांति के उपवास भी रखतें हैं। उपवास से एक दिन व्रत के नियमों का पालन करें और केवल एक ही समय भोजन करें। संक्रांति के दिन व्रत रखने के लिए उपवास का संकल्प लें। सुबह पवित्र मन से उठकर स्नान करें। इस दिन स्नान का भी खास विधान होता है। इस दिन तिल वाले पानी से स्नान कर सूर्य की उपासना करें। उसके बाद  अपने इष्ट देवता की पूजा कर नए अनाज और फल दान करें। संक्रांति के दिन खास ध्यान रखें। भोजन हमेशा सादा करें और  तेल का इस्तेमाल न करें। अगर हो सके तो नए खाने में नयी फसल का प्रयोग करें। अभी लॉकडाउन के दौरान आपके आसपास बहुत से लोग भूखमरी के शिकार होंगे आप उन्हें खाना खिला सकते हैं । साथ ही अपने गली-मुहल्ले के जानवरों और पशु-पक्षियों को भी खाना दें। 

बैसाख महीने में मनायी जाती है बैसाखी 

उत्तर भारत के कुछ इलाकों जैसे पंजाब और हरियाणा में मेष संक्रांति बैसाखी के नाम से मनाया जाता है। बैसाख महीने में पड़ने के कारण इस त्यौहार को बैसाखी कहा जाता है। बैसाखी को किसान लहलहाती फसलों की कटाई के बाद मनाते हैं। इस दिन नाच और गाना होता है और गुरूद्वारों की सजावट की जाती है। घर में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। साथ ही एक दूसरे से मिलने-जुलने का सिलसिला भी जारी रहता है।

केरल में मेष संक्रांति मनाने का अंदाज है निराला 

केरल में मेष संक्रांति को विशु के नाम से जाना जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और आतिशबाजी करते हैं। इसके अलावा विशु कानी भी सजाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पुथंडू के नाम से मनाया जाता है।

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बंगाल में पोइला बैसाखी और असम में बिहू मनाया जाता है

मेष संक्रांति के दिन बंगाल में पोइला बैसाखी मनाया जाता है। इसे 'पाहेला बेषाख' भी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल के साथ ही त्रिपुरा में भी इसे बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। असम में बिहू के रूप मनाए जाने वाले इस त्यौहार की छटा निराली होती है।

सतुआन भी होता है बहुत खास

बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मेष संक्रांति के दिन सतुआन मनाया जाता है। सतुआन को लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और अपने देवी-देविताओं की पूजा करते हैं। सतुआन को सत्तू खाने की परंपरा प्रचलित है। सत्तू को गुड़ के साथ खाया जाता है। साथ ही कुल लोग आम की चटनी, नमक और मिर्च के साथ भी सत्तू खाते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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