Middle East Crisis: हवाई सफर पर दोहरी मार, महंगा हुआ Fuel और हजारों Flights हुईं रद्द

By Ankit Jaiswal | Mar 11, 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक हवाई यात्रा और तेल बाजार पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। बाजार में अनिश्चितता और ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण कई विमानन कंपनियों ने किराए बढ़ाने और अतिरिक्त ईंधन शुल्क लगाने का फैसला किया है।

बता दें कि मध्य पूर्व के कई हिस्सों में हवाई क्षेत्र पर पाबंदियां लगाई गई हैं, जिसके चलते विमानन कंपनियों को अपनी उड़ानों के मार्ग बदलने पड़ रहे हैं। इन वैकल्पिक रास्तों में दूरी अधिक होने से विमानों को अतिरिक्त ईंधन ले जाना पड़ रहा है और इससे लागत भी काफी बढ़ गई है।

विमानन विश्लेषण से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के आंकड़ों के मुताबिक 28 फरवरी से 10 मार्च के बीच मध्य पूर्व से आने-जाने वाली 43 हजार से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। इससे हजारों यात्री विभिन्न हवाई अड्डों पर फंस गए और कई उड़ानों में लंबी देरी भी देखने को मिली।

गौरतलब है कि कई एशियाई और प्रशांत क्षेत्र की विमानन कंपनियों ने किराए बढ़ाने की घोषणा कर दी है। दक्षिण-पूर्व एशिया की एक बड़ी सस्ती विमान सेवा कंपनी ने बताया कि उसने टिकट दरों और ईंधन शुल्क में संशोधन किया है और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इसी तरह भारत की एक प्रमुख विमानन कंपनी ने घरेलू उड़ानों पर प्रति टिकट 399 रुपये तक का ईंधन शुल्क लगाने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण विमानन ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे संचालन लागत पर सीधा दबाव पड़ा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों ने भी टिकट कीमतों में वृद्धि की है और संकेत दिए हैं कि यदि ईंधन महंगा बना रहा तो आगे और बदलाव किए जा सकते हैं। कुछ कंपनियों ने अपनी उड़ान योजनाओं और समय सारिणी की समीक्षा भी शुरू कर दी है।

दूसरी ओर तेल बाजार में भी तेज उतार-चढ़ाव जारी है। कभी कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है तो कभी अचानक गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, खासकर उस समुद्री मार्ग पर जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल भेजा जाता है।

गौरतलब है कि इसी चिंता के कारण निवेशकों में भी अस्थिरता बढ़ी है और कई विमानन कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो विमानन उद्योग को गंभीर आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में कई कंपनियों को अपने विमानों को अस्थायी रूप से खड़ा करना पड़ सकता है और कमजोर आर्थिक स्थिति वाली कुछ विमान सेवाएं संचालन रोकने तक की स्थिति में पहुंच सकती हैं।

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