By Ankit Jaiswal | Mar 25, 2026
पश्चिम एशिया के ऊपर हवाई क्षेत्र में लगी पाबंदियों के कारण भारतीय विमानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। पहले जो उड़ानें सीधे यूरोप और उत्तर अमेरिका जाती थीं, अब उन्हें दक्षिणी मार्ग से होकर जाना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ गया है और ईंधन की खपत भी ज्यादा हो रही है।
वहीं इंडिगो को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय पंजीकरण वाले विमानों के कारण उसे कई देशों के हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं मिल रही है, जिससे उसे अफ्रीका के रास्ते लंबी उड़ानें भरनी पड़ रही हैं।
हालात इतने मुश्किल हो गए हैं कि कुछ उड़ानों को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इससे यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है और कंपनियों की छवि पर असर पड़ा है।
इसी बीच कई विमान कंपनियों ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानों में कटौती कर दी है। इंडिगो ने कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं, जबकि एयर इंडिया ने भी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द की हैं और सीमित सेवाएं ही संचालित कर रही है।
ईंधन की बढ़ती कीमतें भी इस संकट को और गहरा कर रही हैं। विमान ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ गई है। इसके चलते कंपनियों ने यात्रियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है, जिससे यात्रा महंगी हो गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों पर यह अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है, जिससे यात्रियों की जेब पर असर पड़ रहा है। सरकार ने भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में लागत का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में विमान कंपनियों के लिए आने वाले महीने चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।