By अभिनय आकाश | Jun 15, 2026
पूरे मिडिल ईस्ट के तमाम देशों में अमेरिका के कुल 19 से लेकर 24 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें से नौ सबसे अहम एयरबेस हैं। क़तर के अल उदैद एयरबेस पर 10,000 अमेरिकी सैनिकों का ठिकाना है। यूएई का अलदफरा एयरबेस अमेरिकी सेना का सबसे अहम एयरबेस है। इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन, तुर्की और बहरीन में अमेरिकी सेना के सैन्य अड्डे हैं। और हालिया दिनों में ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। मकसद साफ है कि अमेरिका जब-जब हिमाकत करेगा, ईरान पूरी ताकत से उसका जवाब देगा। लेकिन ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिकी सेना की कई कमजोरियों को उजागर किया है। यहां तक कि इन तमाम एयरबेसों पर तैनात अमेरिका के सबसे तगड़े एयर डिफेंस और अन्य हथियार ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के आगे बौने साबित हुए हैं।
आपको बता दें कि अमेरिका और अरबों के लिए यह बहुत बड़ा झटका इसलिए है क्योंकि ईरान अभी तक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के कम से कम 14 रडार तबाह कर चुका है या उन्हें नुकसान पहुंचा चुका है। जानकारी के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के चार एएन टीपीy टू बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस रडार्स को तबाह कर दिया है जो थर्ड एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा कम से कम एक एएनएफपीएस 132 रणनीतिक शुरुआती चेतावनी रडार को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरे टकराव में ईरान ने जिस पैमाने पर मिसाइलों के जत्थे दागे उसने अमेरिका और अन्य देशों के एयर डिफेंस सिस्टम को बुरी तरह से थकाने का काम किया। जिसकी वजह से तैरान की बैलेस्टिक मिसाइलें टकराव में काफी हद तक बढ़त बनाने में कामयाब रही। इसके अलावा ईरान ने अमेरिका के एयरबेस एयरक्राफ्ट शेल्टरों को उड़ाने के बजाय पेट्रियट, थर्ड एगस और नवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम के सेंसर और डाटा फ्यूजन सिस्टम को तबाह करने पर ध्यान दिया। अब एआर 327 रेडार को खत्म करके ईरान ने लंबी दूरी वाले सेंसर कवरेज की ताकत को खत्म कर दिया है। जिसकी वजह से बचाव करने वाले देशों के पास प्रतिक्रिया देने का कम समय बचेगा और उनकी मिसाइल ड्रोंस को चिन्हित करने की ताकत भी कम हो जाएगी। साथ ही पूरे खाड़ी इलाकों को जो मिसाइल हमलों से एक सुरक्षा कवच मिला था, उसकी ताकत भी काफी कम हो गई है।