प्रवासी कामगारों का पलायन जारी, आनंद विहार में दिखा भयानक मंजर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 28, 2020

नयी दिल्ली।  कोरोना वायरस महामारी रोकने के लिए लागू किए गए बंद (लॉकडाउन) के दौरान कई राज्यों के लाखों प्रवासी कामगार अपने मूल निवास स्थान और गांव के लिए पैदल ही चल पड़े हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उनके लिए तत्काल राहत शिविर स्थापित करने और उनके स्वास्थ्य की जांच कराए जाने के निर्देश दिए। इस बीच, कांग्रेस ने इस भयावह स्थिति के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस स्थिति के एक बड़ी त्रासदी में तब्दील होने से पहले सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। देशव्यापी लॉकडाउन का आज चौथा दिन था और अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए प्रवासी कामगारों के लगातार पैदल चलने और पहले से ही खचाखच भरी बसों में घुसने की कोशिश करने के दृश्य देश के कई हिस्सों में आम नजर आ रहे हैं। ये लाखों कामगार राजमार्गों या अंतरराज्यीय बस अड्डों पर फंसे हुए हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने गृह राज्य लौट रहे या ऐसा करने की कोशिश कर रहे प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों के लिए तत्काल राहत शिविर स्थापित करने को कहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए घोषित किए गए 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जतायी है। केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे 21 दिवसीय बंद के कारण प्रभावित प्रवासी मजदूरों को भोजन एवं आश्रय मुहैया कराने के लिए राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसके लिए अगले वित्त वर्ष में 29,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य एस श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने घरों को पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों के लिए शिविर स्थापित करने और उनकी स्वास्थ्य जांच करने को कहा है। देशभर में लॉकडाउन होने के कारण आजीविका से हाथ धो बैठे हजारों दिहाड़ी मजदूर महिलाओं एवं बच्चों समेत अपने सिर एवं पीठ पर सामान लाद कर लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर दिल्ली के आनंद विहार अंतरराज्यीय बस अड्डे पर बसों में चढ़ने का इंतजार करते नजर आए। उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि उसने सीमावर्ती जिलों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए 1,000 बसों का प्रबंध किया है। देश में शनिवार को लॉकडाउन के उल्लंघन के कई मामले दर्ज किए गए। असम पुलिस को बंगाईगांव जिले के एक बाज़ार में बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए शनिवार सुबह हवा में गोली चलानी पड़ी। एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने लोगों से बंद का पालन करने के लिए कहा तो भीड़ ने सुरक्षा कर्मियों पर कथित रूप से हमला कर दिया। असम औद्योगिक सुरक्षा बल (एआईएसएफ) के एक कांस्टेबल की शनिवार को कछार जिले के एक बाजार में मौत हो गई। 

 

इसे भी पढ़ें: गडकरी ने NHAI चेयरमैन और टोल ऑपरेटरों से कहा- प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराएं भोजन, पानी

कांस्टेबल की पत्नी ने उसके पति की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, पुलिस ने कहा कि कांस्टेबल की मौत संभवत: उच्च रक्तचाप के कारण हुई। दिल्ली में बंद के दौरान सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने के मामले में 82 मामले दर्ज किए गए और 3,485 लोगों को हिरासत में लिया गया। गुजरात पुलिस प्रमुख शिवानंद झा ने बताया कि शुक्रवार से 1,595 लोगों के खिलाफ 1,000 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। राजस्थान के झुंझनु में जिला प्रशासन ने बंद के नियमों का उल्लंघन करने वालों को सजा देने का अनूठा तरीका निकाला और इस प्रकार के लोगों को पृथक कक्षों में रह रहे कोरोना वायरस के मरीजों की देखभाल के काम में लगाया गया। नवलगढ़ के एसडीएम मुरारी लाल शर्मा ने भी लोगों से बेवजह सड़कों पर घूमने वाले लोगों की तस्वीर लेने और उन्हें जिला प्रशासन को भेजने की अपील की। केरल पुलिस ने कई स्थानों पर ड्रोन तैनात किए ताकि कर्फ्यू के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जा सके। केरल के कासरगोड में कार्यरत बिहार की एक प्रवासी महिला ने उस समय एम्बुलैंस में ही बच्चे को जन्म दिया जब पुलिस ने उसे मेंगलुरु में अस्पताल जाने के लिए सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी। प्राधिकारियों ने बताया कि बच्चे और मां दोनों की हालत ठीक है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य में आवश्यक सामग्रियां लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख राज्य राजमार्ग को बंद कर देने की कर्नाटक सरकार की कार्रवाई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवगत कराया और उनसे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। 

 

इसे भी पढ़ें: बीमारी पर भारी भूख, दिल्ली में भोजन के लिए हजारों कतारबद्ध

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस भयावह स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति के एक बड़ी त्रासदी में बदलने से पहले सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। राहुल ने ट्वीट किया, सरकार इस भयावह हालत के लिए ज़िम्मेदार है। नागरिकों की ऐसी हालत करना एक बहुत बड़ा अपराध है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गरीबों के पैदल पलायन का एक वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, इन मजबूर हिंदुस्तानियों के साथ ऐसा सलूक मत कीजिए। हमें शर्म आनी चाहिए कि हमने इन्हें इस हाल में छोड़ दिया है। ये हमारे अपने हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, हज़ारों ग़रीब लोग अपने परिवार सहित उत्तर प्रदेश - बिहार पैदल जाने को मजबूर हैं। ये लोग कह रहे हैं कि करोना वायरस से नहीं लेकिन भूख से वह जरूर मर जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी शासित राज्यों में कोरोना वायरस के संकट से निपटने के प्रयासों को तेज करने के लिए शनिवार को एक कार्यबल का गठन किया। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक यह कार्यबल कांग्रेस शासित प्रदेशों में कोरोना वायरस संकट के खिलाफ समन्वय पर काम करेगा ताकि गरीबों और मजदूरों की मुश्किलों को दूर किया जा सके। बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने अपने घरों की ओर पलायन कर रहे प्रवासी कामगारों से शनिवार को अपील की कि वे कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर उसी स्थान पर रहें, जहां वे हैं और अपने बच्चों के हित में फैसला करें। आयोग ने राज्य सरकारों को सलाह दी कि वे सड़कों पर रह रहे बच्चों के रहने का प्रबंध स्कूल की इमारतों में करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संक्रमित न हों।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

T20 World Cup 2026: USA ने छुड़ाए Team India के पसीने, Suryakumar की कप्तानी पारी से मिली पहली जीत

Epstein Files के दबाव में हुई India-US Deal? Sanjay Singh ने PM Modi पर लगाए संगीन आरोप

Tamil Nadu में स्टालिन की हुंकार, Assembly Elections में Mission 200 का लक्ष्य, बोले- NDA को देंगे करारा जवाब

IND vs USA Live Cricket Score: बुमराह-संजू के बिना उतरेगी Team India, USA ने टॉस जीतकर चुनी गेंदबाजी