By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026
कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक ने नयी दिल्ली में हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मंगलवार को तारीफ की और कहा कि इसने “शांति एवं कूटनीति का अच्छा संदेश” दिया। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि मौजूदा समय के युद्ध का दौर नहीं होने के दावे के बावजूद दुनियाभर में टकराव तेजी से बढ़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न धार्मिक संगठनों के समूह ‘मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा’ (एमएमयू) की बैठक के बाद संवाददाताओं से मुखातिब मीरवाइज ने उम्मीद जताई कि तनाव कम करने की कोशिशें रंग लाएंगी और पश्चिम एशिया में शांति बहाल होगी।
हालांकि, हम कहते हैं कि यह दौर युद्ध का दौर नहीं है, लेकिन हमारे सामने जो हकीकत है, वह बिल्कुल इसके उलट है।” भारत की अध्यक्षता में हाल में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में मीरवाइज ने कहा, “मैं समझता हूं कि यह भी एक अहम बात थी कि ब्रिक्स के सिलसिले में दुनियाभर के नेता दिल्ली में जमा हुए। वहां से शांति और कूटनीति का एक अच्छा संदेश गया। हमें उम्मीद है कि ये कोशिशें रंग लाएंगी और शांति कायम होगी... हम हमेशा से इसके समर्थक रहे हैं।” ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अपनी बातचीत से जुड़े एक सवाल के जवाब में मीरवाइज ने कहा कि मुलाकात अच्छी रही और इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों की ओर से एकजुटता का संदेश पहुंचाने का मौका मिला।
उन्होंने कहा, “हमने उन्हें एकजुटता का संदेश दिया। हमारा मानना है कि जब तक न्याय नहीं होता, तब तक शांति कायम नहीं हो सकती। इसलिए हमने उन्हें यह संदेश पहुंचाया।
हमने ईरान और कश्मीर के बीच सदियों से मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सभ्यतागत संबंधों के बारे में भी बात की।” मीरवाइज ने कहा कि ईरानी नेताओं ने कश्मीर का दौरा करने और वहां के लोगों से बातचीत करने की गहरी इच्छा जाहिर की। मीरवाइज ने अराघची को पेजेश्कियान के नाम दो पन्ने का पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने संयम, बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की ‘अहिंसा’ की विचारधारा की विरासत के साथ भारत बातचीत को बढ़ावा देने और पश्चिम एशिया के संघर्ष को और बढ़ने से रोकने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।