Mithali Raj ने याद किए संघर्ष के दिन, बोलीं- लोग Cricket किटबैग को हॉकी बैग समझते थे

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 10, 2026

आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम पिछले साल की वनडे विश्व कप खिताबी जीत के बाद अब टी20 विश्व कप खिताब जीतने की मुहिम में जुटी है और पूर्व कप्तान मिताली राज ने बुधवार को कहा कि उनका सफर देश में महिला क्रिकेट की उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है जिसमें सीमित मौकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनना शामिल है। मिताली ने कहा कि उनका व्यक्तिगत सफर देश में इस खेल के विकास की कहानी भी है।

मिताली ने कहा कि अनुकूलन क्षमता, परिस्थितियों की समझ और सीखने की इच्छा ऐसी खूबियां हैं जो भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। मिताली ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘कई बार हम बहुत मेहनत करते हैं और महसूस करते हैं कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है लेकिन फिर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिनके लिए हम तैयार नहीं होते। यदि आप अपने आसपास के माहौल और परिस्थितियों को समझते हैं तो उनके अनुसार खुद को ढालने की बेहतर स्थिति में होंगे। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए खुले विचारों वाला होना, सीखने की इच्छा रखना, नए अनुभव हासिल करना और उन्हें अपने प्रशिक्षण में शामिल करना जरूरी है। मेरी सलाह है कि हमेशा जागरूक रहें और नयी चीजों को अपनाने के लिए तैयार रहें। ’’

अपने शुरुआती दिनों की चुनौतियों को याद करते हुए मिताली ने कहा कि जब वह बड़ा किटबैग लेकर ट्रेन से यात्रा करती थीं तो लोग अक्सर उन्हें हॉकी खिलाड़ी समझ लेते थे क्योंकि बहुत कम लोगों को पता था कि भारत में महिलाएं भी क्रिकेट खेलती हैं। मिताली ने कहा, ‘‘जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, तब बहुत कम लोग जानते थे कि महिलाएं भी क्रिकेट खेलती हैं। लोग मेरा किटबैग देखकर पूछते थे कि क्या मैं हॉकी खेलती हूं। किसी ने यह कल्पना भी नहीं की कि यह किसी महिला क्रिकेटर का बैग हो सकता है। ’’ 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाली एकमात्र महिला क्रिकेटर मिताली ने कहा कि 1990 के दशक में आम धारणा यही थी कि महिलाएं क्रिकेट नहीं खेलतीं। उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘‘लोगों की सोच थी कि हमने कभी महिलाओं को सड़कों पर क्रिकेट खेलते नहीं देखा, इसलिए शायद वे क्रिकेट खेलती ही नहीं हैं। ’’

मिताली ने कहा कि उनके दौर में मौके आसानी से नहीं मिलते थे। क्रिकेटर बनने की चाह रखने वालों को अपनी मेहनत, संघर्ष और लगातार प्रयासों से खुद अपना रास्ता बनाना पड़ता था। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम खेल रहे थे, तब हमें खुद मौके पैदा करने पड़ते थे। हमें इस खेल को पहचान दिलाने के लिए काम करना पड़ता था। कई बार किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत मेहनत और शानदार प्रदर्शन के कारण ही लोग मैच देखने आते थे। ’’ मिताली ने कहा कि अगर उस समय बेहतर सहयोग प्रणाली और मजबूत खेल ढांचा होता, तो कई खिलाड़ी निराशा या मौकों की कमी के कारण खेल छोड़ने के बजाय अपना करियर लंबा चला सकती थीं। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में मजबूत सहयोग व्यवस्था की कमी ने महिला क्रिकेट के विकास को धीमा कर दिया और कई खिलाड़ियों के करियर छोटे रह गए।

मिताली ने कहा, ‘‘अगर 1990 के दशक में उचित खेल ढांचा होता तो महिला क्रिकेटरों को अपना करियर लंबा करने में मदद मिलती। इससे खेल का विकास बहुत तेजी से होता और इसकी पहचान भी काफी पहले बढ़ जाती। अगर ऐसा ढांचा पहले से होता, तो इसमें इतना समय नहीं लगता। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारे पास भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) है। हम 2007 में बीसीसीआई के अधीन आए थे। उससे पहले देश में महिला क्रिकेट और महिला क्रिकेटरों के लिए यह खेल केवल अस्तित्व बचाए रखने की लड़ाई जैसा था।

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