क्या नीतीश कुमार ने दी लल्लन सिंह की कुर्बानी ? चिराग पासवान ने दिया यह बयान

By अनुराग गुप्ता | Jul 08, 2021

पटना। राजनीति में लगभग चार दशकों का अनुभव रखने वाले पशुपति कुमार पारस ने अपने राजनीतिक जीवन का अधिकांश समय अपने दिवंगत भाई रामविलास पासवान की छत्रछाया में बिताया है। पारस को केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई और यह बात दिवंगत रामविलास पासवान के बेटे चिराग को पच नहीं पाई। कभी खुद को हनुमान बताने वाले चिराग अपने राम से पार्टी में जारी घमासान को लेकर मदद मांगते रहे मगर उन्हें कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिली बल्कि उनके चिरप्रतिद्वंद्वी पशुपति पारस का कद ऊंचा कर दिया गया। 

लोजपा में जारी घमासान के बीच चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ही पार्टी को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक व्यक्ति को मंत्रिमंडल से दूर रखने और अपनी कुर्सी को बचाने के लिए अपने ही नेताओं और पार्टी को कमजोर किया है। इसी बीच चिराग ने आगे वाले समय में जदयू में टूट दिखने की आशंका जताई है।

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि नीतीश कुमार ने मुझे मंत्री नहीं बनने देने के लिए अपनी ही पार्टी के नेता राजीव रंजन (लल्लन सिंह) की कुर्बानी दे दी। 

इससे पहले चिराग ने ट्वीट पशुपति पारस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी विरोधी और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने के कारण लोक जनशक्ति पार्टी से पशुपति कुमार पारस जी को पहले ही पार्टी से निष्काषित किया जा चुका है और अब उन्हें केंद्रीय मंत्री मंडल में शामिल करने पर पार्टी कड़ा ऐतराज दर्ज कराती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के इस अधिकार का पूर्ण सम्मान है कि वे अपनी टीम में किसे शामिल करते हैं और किसे नहीं। लेकिन जहां तक लोजपा का सवाल है तो पारस जी हमारे दल के सदस्य नहीं हैं। पार्टी को तोड़ने जैसे कार्यों को देखते हुए उन्हें मंत्री, उनके गुट से बनाया जाए तो लोजपा का कोई लेना देना नहीं है। 

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उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा पार्टी से निकाले गए सांसदों में से पशु पति पारस जी को नेता सदन मानने के बाद लोजपा ने माननीय लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उनके फ़ैसले पर पुनः विचार याचिका दी थी जो अभी भी विचाराधीन है।

चिराग ने किया अदालत का रूख

चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष के प्रारम्भिक फैसले, जिसमें पार्टी से निष्कासित सांसद पशुपति पारस को लोजपा का नेता सदन माना था, के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। अधिवक्ता अरविंद बाजपेयी ने कहा कि उन्होंने चिराग पासवान और लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है।

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