धनी वर्ग की अपेक्षा आम आदमी से अधिक कर ले रही मोदी सरकार: दिग्विजय सिंह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 03, 2022

नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सामाजिक समरसता को बाधित किया गया और धर्मांधता के नाम पर समाज में कटुता फैलायी गयी। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार धनी वर्ग की जगह आम आदमी से अधिक कर ले रही है कांग्रेस सदस्य सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की नीति एक ऐसे संगठन से प्रभावित है जिसका लोकतांत्रिक मूल्यों व संविधान में विश्वास नहीं है और जिसने तिरंगा व संविधान का विरोध किया था। उन्होंने किसी संगठन का नाम लिए बिना कहा कि उस संगठन का प्रयास एक वर्ग को राष्ट्रविरोधी बताना तथा देश में वैमनस्य को बढ़ावा देना है। उन्होंने पिछले दिनों हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्माद फैलाने वाले भाषणों पर प्रधानमंत्री मोदी ने कोई टिप्पणी नहीं की। 

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दिग्विजय सिंह उच्च सदन में राष्ट्रपति अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार आयी थी तो उसने काला धन वापस लाने और महंगाई कम करने सहित तमाम वादे किए थे। लेकिन सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस सरकार की सामाजिक-आर्थिक नीति ऐसी रही है जिससे धनी वर्ग और धनी होता गया वहीं गरीब लोग और गरीब होते गए। उन्होंने पिछली संप्रग सरकार और भाजपा नीत मौजूदा सरकार के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में कुल कर संग्रह में प्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से भी ज्यादा थी जिसका अर्थ है कि धनी वर्ग पर ज्यादा कर लगता था। उन्होंने कहा कि लेकिन इस सरकार में स्थिति उलट हो गयी और अब अप्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी बढ़ गयी है जिससे स्पष्ट होता है कि धनी वर्ग कम कर दे रहा है और निर्धन वर्ग व आम आदमी से अधिक कर वसूला जा रहा है। 

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सिंह ने देश में बेरोजगारी में तेजी से वृद्धि होने का दावा करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश में अमीर-गरीब की खाई सबसे ज्यादा भारत में ही है। उन्होंने कहा कि सरकार के कदम गरीब विरोधी हैं और वह एक ओर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि करती रही वहीं दूसरी ओर सब्सिडी भी घटाती रही जो आम आदमी को मिलती है। उन्होंने दावा किया कि सब्सिडी में 27 प्रतिशत तक की कमी की गयी जबकि कार्पोरेट कर पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार को उन लोगों पर कर लगाना चाहिए जिनकी आय कोविड महामारी के दौरान बढ़ी। उन्होंने सरकार पर गरीब, किसान व मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार संसदीय व लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि कानून बनाने से पहले संबंधित पक्षों से गहन विचार विमर्श जाता है और संसदीय समिति में भी उस पर चर्चा की जाती है। उन्होंने कहा कि वापस लिए गए कृषि कानूनों के संसद से पारित होने के दौरान भी विपक्ष ने उसे प्रवर समिति में भेजने की मांग की थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने सरकार को ‘सिंगल मैन कैबिनेट’’ करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री व सरकार को विपक्ष से भी सलाह मशविरा करना चाहिए और अपनी गलतियां सुधारनी चाहिए।

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