Europe के दरवाजे पर पहुंच मोदी ने किया ऐसा ऐलान, साइप्रस में जगी उम्मीद और तुर्की में बढ़ी बेचैनी

By अभिनय आकाश | Jun 16, 2025

तुर्की को अंदाजा ही नहीं है कि भारत के कश्मीर और पाकिस्तान से दोस्ती करना उसे कितना महंगा पड़ने वाला है।लेकिन इस समय इसकी एक झलक भारत तुर्की को दिखा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी 7 सम्मेलन में जाना था। इस सम्मेलन में जाना ही अपने आप में पाकिस्तान और तुर्की के लिए मुंहतोड़ जवाब था। कनाडा में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 और देशों का दौरा करना तय किया। इसमें एक साइप्रस और दूसरा क्रोशिया है। साइप्रस को तुर्की अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। उसी साइप्रस के सामने भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। ये दोस्ती केवल कहने के लिए नहीं है। साइप्रस पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे भारत का खजाना खोला, उससे साफ है कि साइप्रस को लेकर भारत का प्लान बहुत ठोस और बड़ा है, जो तुर्की के सोच से बहुत दूर रहने वाला है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के दौरे के पहले चरण में साइप्रस पहुंचे, जहां उनका राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स ने एयरपोर्ट पर विशेष स्वागत किया। स्वागत को भारत-साइप्रस संबंधों की गहराई का प्रतीक बताया गया। मोदी पिछले 20 वर्षों में साइप्रस का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई गति देगी। होटल पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने 'भारत माता की जय' के नारों से उनका स्वागत किया। पीएम मोदी साइप्रस के बाद कनाडा में जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और फिर क्रोएशिया में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। 

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 यूरोप का दरवाजा

प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस में कई भारतीय कंपनियों को लेकर एक ऐसा ऐलान किया, जिसके बाद साइप्रस में उम्मीद जगी और तुर्की में बेचैनी। दोनों देशों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए साइप्रस के राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच बैठक हुई। इसी बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की इकोनॉमी का जिक्र किया और बताया कि कैसे साइप्रस भारत के लिए भरोसमंद पार्टनर है। व्यापार को बढ़ावा देने और बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भी दोनों के बीच बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने तो साइप्रस को यूरोप का दरवाजा बता दिया। जो तुर्की के लिए सबसे बड़ा तमाचा था। 

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तुर्की का कट्टर दुश्मन साइप्रस

साइप्रस, जिसे आधिकारिक तौर पर साइप्रस गणराज्य कहा जाता है, पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित एक द्वीप देश है। यह ग्रीस के पूर्व में और तुर्की के दक्षिण में स्थित है। यह द्वीप निकटतम ग्रीक द्वीप (रोड्स) से 250 मील दूर है और एथेंस 460 मील दूर है। 1821 में ग्रीस को ओटोमन्स से आजादी मिलने तक ग्रीक और तुर्की साइप्रस अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से रहते थे। 1974 को ग्रीस के समर्थन से सैन्य तख्तापलट हुआ। जिसके जवाब में तुर्की की सेना ने साइप्रस पर हमला कर दिया। तुर्की सेना 20 जुलाई को साइप्रस में उतरी और युद्ध विराम घोषित होने से पहले द्वीप के 3% हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। तुर्की सेना ने अगस्त 1974 में अपने मूल समुद्र तट का विस्तार किया , जिसके परिणामस्वरूप द्वीप के लगभग 36% हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया गया। तुर्की के कब्जे के बाद से ही साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया। अगस्त 1974 से युद्ध विराम रेखा साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र बफर ज़ोन बन गई और इसे आमतौर पर ग्रीन लाइन के रूप में जाना जाता है। स्वाभाविक रूप से, तुर्की के साथ संप्रभुता, समुद्री सीमा और अन्य मुद्दों पर उनके बड़े मतभेद हैं। एक तरफ ग्रीस और साइप्रस हैं तो दूसरी तरफ तुर्किए है। भारत संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत साइप्रस समस्या के समाधान के पक्ष में रहा है। तुर्की जहां पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है, वहीं भारत ने साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। साइप्रस आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। 

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