चीन की मोनोपोली को मोदी की खुली चुनौती, रेयर अर्थ मामले में भारत जल्द बनेगा आत्मनिर्भर

By नीरज कुमार दुबे | Aug 26, 2025

आज की दुनिया में रेयर अर्थ मैग्नेट्स और क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल) बिना इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और बैटरी इंडस्ट्री की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब तक इन संसाधनों पर चीन का जबर्दस्त वर्चस्व रहा है। मोदी सरकार ने National Critical Mineral Mission की शुरुआत कर भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस मिशन के तहत भारत के विभिन्न हिस्सों में खोज अभियान चलाकर घरेलू खनिज क्षमता बढ़ाई जा रही है। लक्ष्य यह है कि भारत को rare earth supply chains के लिए आत्मनिर्भर बनाया जाए और विदेशी दबाव कम हो। यह कदम सीधा चीन की rare earth monopoly को चुनौती देता है, क्योंकि अब भारत खुद अपनी सप्लाई लाइन तैयार करेगा।

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हम आपको बता दें कि अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों की सप्लाई चेन में चीन का लगभग 80% नियंत्रण था— खासकर रेयर अर्थ माइनिंग, प्रोसेसिंग और बैटरी निर्माण में। मोदी सरकार का National Critical Mineral Mission इस निर्भरता को तोड़ने का बड़ा कदम है। ईवी और बैटरी प्लांट्स का लोकलाइज़ेशन, सेमीकंडक्टर उत्पादन और क्रिटिकल मिनरल्स की खोज भारत को स्ट्रैटेजिक स्वतंत्रता देगा। इससे अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे देशों को भी भारत एक विश्वसनीय सप्लायर दिखाई देगा।

Maruti Suzuki की e-Vitara का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा— “Make in India, Make for the World।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और भारत सरकार को यह भी पता है कि ऑटो उद्योग के लिए रेयर अर्थ मैंगनीज़ की कमी है। इस दिशा में उद्योग की क्षमता बढ़ाने के लिए हमने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन की भी शुरुआत की है। इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में और अधिक खोज अभियानों को अंजाम दिया जाएगा और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज की जाएगी।

हम आपको बता दें कि पिछले 10 वर्षों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 500% बढ़ा है साथ ही मोबाइल फोन में 2700% और रक्षा उत्पादन में 200% की वृद्धि हुई है। देखा जाये तो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, युवा डेमोग्राफी और स्किल्ड वर्कफोर्स निवेशकों के लिए Win-Win Situation बना रही है। आने वाले वर्षों में भारत ईवी, बैटरी और सेमीकंडक्टर का ग्लोबल हब बनने की ओर बढ़ रहा है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी का यह अभियान केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक रणनीति भी है। रेयर अर्थ और ईवी सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करके भारत न सिर्फ चीन की मोनोपोली को तोड़ेगा, बल्कि आने वाले दशक में नई टेक्नॉलॉजी का वैश्विक केंद्र भी बनेगा।

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