Modi-Trump Meeting पर Pakistan में गजब रिएक्शन, Islamabad Lahore Karachi में जो कुछ हुआ वो देखने लायक था

By नीरज कुमार दुबे | Jun 18, 2026

जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहा कि अगर भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका भारत के साथ खड़ा रहेगा, तो इस बयान ने पाकिस्तान की सत्ता और सेना के गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी। दरअसल हाल के दिनों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर जिस तरह ट्रंप की तारीफों के पुल बांध रहे थे और उनकी जबरदस्त चापलूसी कर रहे थे उससे इस्लामाबाद को लगने लगा था कि वॉशिंगटन हर हाल में पाकिस्तान के पक्ष में झुका रहेगा। लेकिन फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात ने पाकिस्तान की इन उम्मीदों को करारा झटका दे दिया। ट्रंप ने न केवल मोदी की खुलकर प्रशंसा की बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को भी मजबूत बताते हुए साफ संकेत दिया कि रणनीतिक दृष्टि से भारत आज अमेरिका का सबसे भरोसेमंद साझेदार बन चुका है।

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हम आपको बता दें कि पाकिस्तानी मीडिया की नजरें इस मुलाकात पर टिकी हुई थीं। वहां के टीवी चैनलों पर चल रही बहसों में बार-बार यह सवाल उठाया जा रहा था कि आखिर ट्रंप ने मोदी की इतनी खुलकर प्रशंसा क्यों की? कई पाकिस्तानी विश्लेषकों ने इसे पाकिस्तान की विदेश नीति की विफलता बताया। उनका कहना था कि जिस अमेरिका को पाकिस्तान अपने पक्ष में मान रहा था, वही अब भारत के साथ खुले तौर पर खड़ा दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक यह चर्चा चलती रही कि मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता बहुत अधिक मजबूत हो चुकी है।

पाकिस्तानी मीडिया में चल रही बहसों में एक और बात बार-बार सामने आ रही है। वहां के कई वरिष्ठ विश्लेषक खुलकर कह रहे हैं कि दुनिया के इतने बड़े वैश्विक सम्मेलनों में पाकिस्तान को बुलाया तक नहीं जाता, जबकि भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में सम्मान दिया जाता है। पाकिस्तानी चैनलों पर यह चर्चा भी हुई कि पाकिस्तान जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाता है तो उसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक मदद मांगना होता है, जबकि भारत दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ आंखों में आंखें डालकर बराबरी के स्तर पर व्यापार और रणनीतिक समझौते करता है। इस दौरान शहबाज शरीफ का वह बयान भी खूब चर्चा में रहा जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि विदेशों से पैसे मांगते मांगते उनका और असीम मुनीर का सिर शर्म से झुक जाता है। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि एक तरफ भारत जी-7 जैसे मंचों पर वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अब भी कर्ज और आर्थिक सहायता के भरोसे अपनी व्यवस्था चलाने को मजबूर दिखाई देता है।

साथ ही, जी-7 सम्मेलन में मोदी को जो सम्मान मिला, उसने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है। सम्मेलन की सामूहिक तस्वीरों में मोदी केंद्र में दिखाई दिये और दुनिया के कई प्रमुख नेताओं ने उनके नेतृत्व की सराहना की। विकसित देशों के नेताओं के साथ मोदी की लगातार बैठकों ने यह संदेश दिया कि भारत आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का अहम केंद्र बन चुका है। भारत के साथ व्यापारिक और रणनीतिक समझौतों को लेकर भी कई देशों ने उत्साह दिखाया। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं और ट्रंप ने कहा कि दोनों देश एक बड़ी डील के बेहद करीब हैं।

मोदी ने इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। ट्रंप ने इस चिंता को गंभीरता से सुना और भारत के प्रति सहानुभूति जताई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका अपने रणनीतिक संबंधों को नई गति देना चाहते हैं।

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यह रही कि ट्रंप ने मोदी को अपना करीबी मित्र बताया और उन्हें एक मजबूत तथा कठिन वार्ताकार कहा। यह वही ट्रंप हैं जिनके बारे में पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह भारत की बजाय पाकिस्तान को तरजीह देंगे। लेकिन फ्रांस में हुई इस मुलाकात ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति में भारत का महत्व कहीं अधिक है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाने और वैश्विक व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अमेरिका भारत को एक प्रमुख शक्ति के रूप में देख रहा है।

जी-7 सम्मेलन के दौरान मोदी की सक्रिय कूटनीति ने भी दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने कई वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं और भारत की आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता तथा स्थिर नेतृत्व का प्रभाव छोड़ा। पाकिस्तान के लिए यह दृश्य असहज करने वाला था क्योंकि वहां राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सेना पर निर्भर सत्ता व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है।

बहरहाल, फ्रांस में मोदी और ट्रंप की मुलाकात केवल दो नेताओं की सामान्य बातचीत नहीं थी, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी थी। इस मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया कि विश्व मंच पर भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, जबकि पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत घटती जा रही है। यही कारण है कि ट्रंप के एक बयान ने इस्लामाबाद में बेचैनी बढ़ा दी और पाकिस्तानी मीडिया को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मोदी की कूटनीतिक सफलता के सामने पाकिस्तान कहीं नहीं टिकता।

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