By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 18, 2026
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को नाव की मदद से जाजपुर जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और 7.85 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने घुटनों तक पानी में खड़े होकर लोगों की परेशानियां सुनीं और उन्हें जल्द राहत और पुनर्वास का भरोसा दिलाया। माझी ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और मदद सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राहत शिविरों में परोसे जा रहे पके हुए खाने की गुणवत्ता की भी जांच की और कहा कि उत्तरी ओडिशा में बार-बार आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए बाढ़-नियंत्रण के स्थायी उपाय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बाद में भद्रक जिले के बाढ़ प्रभावित कुछ गांवों का भी दौरा किया। हालांकि, मुख्यमंत्री का भद्रक जिले का दौरा राजनीतिक विवादों में घिर गया। विधानसभा में विपक्ष की प्रमुख सचेतक प्रमिला मलिक समेत बीजू जनता दल (बीजद)के विधायकों ने सड़क पर धरना दिया और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के नाव से प्रभावित इलाकों के सर्वेक्षण के दौरान उन्हें साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई।
मलिक ने आरोप लगाया कि जहां भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्री मुख्यमंत्री के साथ थे, वहीं उन्होंने जान-बूझकर स्थानीय बीजद विधायकों को साथ आने नहीं दिया। इस बीच, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत ने कहा कि बाढ़ की स्थिति अगले चार-पांच दिनों तक बनी रह सकती है, क्योंकि ‘अवदाब’ के कारण हुई भारी बारिश के बाद ब्रह्मणी और बैतरणी नदियों में जलस्तर ऊंचा बना हुआ है। राउत ने संवाददाताओं को बताया कि जाजपुर और भद्रक ज़िलों में भारी बाढ़ लाने के बाद बैतरणी और ब्राह्मणी नदियों के जलस्तर में कमी आने में चार दिन लग सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जाजपुर जिले में तटबंधों में पड़ी दरार की मरम्मत का काम अभी चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 2.77 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और उन्हें लगभग 531 राहत शिविरों में रखा गया है, जिनमें नदी के तटबंधों और स्कूलों में बने शिविर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बालासोर, भद्रक, जाजपुर, क्योंझर, मयूरभंज और केंद्रपाड़ा जिलों के 126 गांव अब भी जलमग्न हैं।
इस बीच, राज्य सरकार ने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। खराब मौसम के कारण सोमवार को स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहे। आईएमडी ने बताया कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तटों पर बना कम दबाव का एक स्पष्ट क्षेत्र अब ‘अवदाब’ में बदल गया है।
उसने बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान इस अवदाब प्रणाली के उत्तर-पश्चिम की ओर, गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल से होते हुए झारखंड की तरफ बढ़ने की बहुत संभावना है। आईएमडी ने बालासोर, क्योंझर और मयूरभंज ज़िलों में मूसलाधार बारिश की संभावना के मद्देनजर ‘रेड अलर्ट’ (कार्रवाई करने का अलर्ट) जारी किया है। वहीं भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, सुंदरगढ़, झारसुगुडा, संबलपुर, देवगढ़, अंगुल और ढेंकनाल के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’(कार्रवाई के लिए तैयार रहने का अलर्ट) जारी किया है।
मौसम विभाग ने मछुआरों को 18 अगस्त तक उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास समुद्र में न जाने की सलाह दी है। विभाग ने कहा कि अवदाब के असर से समुद्र की स्थिति बहुत खराब होने की आशंका है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि उत्तरी ओडिशा के संवेदनशील इलाकों में लगभग 100 बचाव दल तैनात किए गए हैं और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं को मौके पर भेजा गया है ताकि तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आपदा के असर को कम किया जा सके।
प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को भी भद्रक, जाजपुर और बालासोर जिलों में भेजा गया। इस बीच, कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार सुबह 5.30 बजे तक बालासोर शहर में 93.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।