Prabhasakshi NewsRoom: Mahua Moitra पर लगे आरोपों को उद्योगपति Darshan Hiranandani ने ठहराया सही, TMC MP की मुश्किलें बढ़ीं

By नीरज कुमार दुबे | Oct 20, 2023

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं क्योंकि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से उन पर जो आरोप लगाये गये थे उसे उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी ने अपने कबूलनामे के जरिये सही ठहरा दिया है। हालांकि इस पर महुआ मोइत्रा ने कहा है कि उद्योगपति का हलफनामा दर्शाता है कि उसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने ड्राफ्ट किया है। उन्होंने कहा है कि यह हलफनामा एक जोक के अलावा कुछ नहीं है। महुआ ने कहा है कि ऐसा लगता है कि दर्शन को इस पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया है।

हम आपको याद दिला दें कि इस सप्ताह की शुरुआत में, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मोइत्रा के अलग हुए साथी और वकील जय अनंत देहाद्रई ने आरोप लगाया था कि मोइत्रा ने संसद में सवाल उठाने के लिए हीरानंदानी से मदद ली थी। इस पर मोइत्रा ने उनके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष मानहानि का मुकदमा किया है।

हीरानंदानी ने कहा कि वर्ष 2017 में ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ में मोइत्रा से मुलाकात के बाद, जब वह विधायक थीं, वह पिछले कुछ वर्षों में उनकी ‘‘करीबी निजी दोस्त’’ बन गईं। हीरानंदानी ने कहा कि इससे उन्हें विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में व्यापार का अवसर मिलने की उम्मीद थी। हीरानंदानी ने मोइत्रा के 2019 में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा चुनाव जीतने के बारे में कहा, ‘‘वह बहुत महत्वाकांक्षी थीं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम कमाना चाहती थीं।’’ हीरानंदानी ने कहा, ‘‘उन्हें उनके दोस्तों और सलाहकारों ने सलाह दी कि सबसे छोटा रास्ता अपनाना चाहिए और वह मोदी पर व्यक्तिगत हमला करके प्रसिद्धि पा सकती हैं।’’

हीरानंदानी ने कहा, ‘‘हालांकि, प्रधानमंत्री की बेदाग प्रतिष्ठा है और वह किसी को भी नीति, शासन या व्यक्तिगत आचरण में उन पर हमला करने का कोई मौका नहीं दे रहे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि उनकी (मोइत्रा) आदत थी, उन्होंने सोचा कि मोदी पर हमला करने का एकमात्र तरीका गौतम अडाणी और उनके समूह पर हमला करना है क्योंकि दोनों समकालीन हैं और वे एक ही राज्य गुजरात से हैं।’’ हीरानंदानी ने कहा कि उन्हें इस तथ्य से मदद मिली कि अडाणी ने व्यापार, राजनीति और मीडिया के कुछ वर्गों में ईर्ष्या पैदा कर दी थी और उनके आलोचक थे। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, उन्हें अडाणी को निशाना बनाकर प्रधानमंत्री को बदनाम करने और शर्मिंदा करने के अपने प्रयास में इन वर्गों से समर्थन मिलने की उम्मीद थी।’’ हीरानंदानी ने कहा कि उन्हें आईओसी द्वारा उनकी कंपनी के एलएनजी टर्मिनल की जगह धामरा को चुनने के बारे में पता था। उन्होंने कहा, ‘‘इस जानकारी के आधार पर, मोइत्रा ने कुछ सवालों का मसौदा तैयार किया, जिनमें अडाणी समूह को निशाना बनाकर सरकार को शर्मिंदा करने वाले तत्व रहे होंगे; ऐसे सवाल जिन्हें वह संसद में उठा सकती थीं।’’ हीरानंदानी ने दावा किया, ‘‘उन्होंने सांसद के रूप में अपनी ई-मेल आईडी मेरे साथ साझा की, ताकि मैं उन्हें जानकारी भेज सकूं और वह संसद में सवाल उठा सकें। मैंने उनके प्रस्ताव को मान लिया।’’

हीरानंदानी ने दावा किया कि अडाणी समूह से संबंधित सवालों का जो पहला सेट उन्होंने भेजा था, मोइत्रा उससे मिली प्रतिक्रिया से प्रसन्न थीं। हीरानंदानी ने कहा कि इसके बाद मोइत्रा ने उनसे अडाणी समूह पर अपने हमलों में उनका सहयोग जारी रखने का ‘‘अनुरोध’’ किया। हीरानंदानी ने कहा, उन्होंने ‘‘मुझे अपना संसद लॉगिन और पासवर्ड प्रदान किया ताकि आवश्यकता पड़ने पर मैं सीधे उनकी ओर से प्रश्न पोस्ट कर सकूं।’’

हीरानंदानी से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो पाया। हलफनामा सार्वजनिक होने के बाद उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपना अकाउंट डिलीट कर दिया। हीरानंदानी ने अडाणी समूह द्वारा केरल में बंदरगाह परिचालन शुरू करने संबंधी खबर इस सप्ताह ‘एक्स’ पर रीपोस्ट की थी। इस बीच, निशिकांत दुबे की शिकायत को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की आचार समिति को भेज दिया है। 

हम आपको यह भी बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर आज सुनवाई कर सकता है, जिसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, एक वकील और कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म और मीडिया संस्थानों को उनके खिलाफ कोई भी फर्जी और अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने, प्रसारित करने या प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका 17 अक्टूबर को दायर की गयी थी जो न्यायमूर्ति सचिन दत्ता के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

पश्चिम बंगाल की कृष्णनगर लोकसभा सीट से सांसद मोइत्रा ने दुबे, वकील जय अनंत देहाद्रई, सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’, सर्च इंजन गूगल, यूट्यूब और 15 मीडिया संस्थानों को उनके खिलाफ अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बयानों के प्रकाशन, प्रसारण से स्थायी रूप से रोकने का अनुरोध किया है। मोइत्रा ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में आरोपों को खारिज किया है और दावा किया कि उनकी साख खराब करने के लिए ये आरोप गढ़े गये हैं।

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