इन मंदिरों के दर्शन किए बिना अधूरी है वाराणसी की यात्रा

By मिताली जैन | Nov 04, 2019

वाराणसी हिन्दू धार्मिक परंपरा का केन्द्र है। मार्क ट्वेन ने इस शहर की विशेषता बताते हुए लिखा है− वाराणसी इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किवदंती से भी पुराना है, और जितना दिखता है उतना पुराना है। यहां पर कई बेहतरीन मंदिर हैं, जो न सिर्फ आस्था बल्कि आकर्षण का भी केन्द्र है। वाराणसी को मंदिरों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। तो चलिए आज हम आपको वाराणसी के कुछ बेहतरीन मंदिरों के बारे में बता रहे हैं−

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अन्नपूर्णा मंदिर− अन्नपूर्णा देवी मंदिर विश्वनाथ मंदिर के काफी समीप स्थित है। इस मंदिर में देवी पार्वती को भोजन और पोषण के दाता के रूप में पूजा जाता है। भक्त यहां पर स्वतंत्र रूप से दान करते हैं। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 1700 के दशक में पेशवा बाजी राव ने करवाया था।


काल भैरव मंदिर− काल भैरव मंदिर भी वाराणसी के सबसे पुराने मंदिरों की सूची में से एक है। माना जाता है कि काल भैरव शहर के संरक्षक हैं और संकट में पड़े भक्तों के रक्षक हैं।

भारत माता मंदिर− यह भारत माता को समर्पित एक अनूठा मंदिर है। मातृभूमि को समर्पित यह मंदिर स्वयं में बेहद अनोखा है। इस मंदिर का निर्माण 1936 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में किया गया था। गांधीजी ने खुद मंदिर का उद्घाटन किया था।


तुलसी मानस मंदिर− वाराणसी में बिरला तुलसी मानस मंदिर एक बेहद प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह 1964 में बनाया गया था और यह भगवान राम को समर्पित है। तुलसीदास का प्रसिद्ध रामचरितमानस मंदिर की दीवारों पर अंकित है। इस मंदिर में जुलाई/अगस्त के महीनों में कठपुतलियों का एक विशेष खेल प्रदर्शन होता है, जिसका संबंध रामायण से होता है। इस खेल को देखने का एक अलग ही अनुभव है।


त्रिदेव मंदिर− ऐसा बहुत कम होता है कि हम त्रिदेवों के तीनों देवों− ब्रह्मा, विष्णु और शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर निर्मित हो। वाराणसी का त्रिदेव मंदिर इस संदर्भ में अद्वितीय है और प्रत्येक दिन सैकड़ों भक्त यहां पर त्रिदेव के दर्शन करने आते हैं।


विशालाक्षी मंदिर− काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर काशी विशालाक्षी मंदिर है। यह पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां शिव की पत्नी सती का आंख गिरा था।


मृत्युंजय महादेव मंदिर− शिव को कई रूपों में पूजा जाता हैय इनमें से एक मृत्युंजय का है, अर्थात् जो मृत्यु पर स्वयं विजय प्राप्त करता है। मृत्युंजय के रूप में शिव को समर्पित इस मंदिर में भक्तों द्वारा बड़ी संख्या में आते हैं और अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं।

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सारनाथ− सारनाथ देश के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यह वाराणसी शहर से केवल 13 किलोमीटर की दूरी पर है और सारनाथ का स्तूप इसका सबसे बड़ा आकर्षण है।


नेपाली मंदिर− ललित घाट में स्थित नेपाली मंदिर को मिनी खजुराहो के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1800 के दशक में नेपाल के राजा, राणा बहादुर शाह द्वारा किया गया था और यह भगवान शिव को समर्पित है।

मिताली जैन

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