सांसदों को बोध होना चाहिए उनकी बातों से लोकतंत्र की साख बनती-बिगड़ती है: अमित शाह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 04, 2019

नयी दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष एवं गृह मंत्री अमित शाह ने नवनिर्वाचित सांसदों से बृहस्पतिवार को कहा कि हम सभी को इस बात का बोध होना चाहिए कि हम जो बोलते हैं उससे ‘‘संसद और हमारे लोकतंत्र की साख बनती-बिगड़ती है’’, ऐसे में सभी को अपने दायित्व का ध्यान होना चाहिए। लोकसभा सचिवालय की ओर से नवनिर्वाचित सांसदों के लिये आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘‘हमें ये सदैव ध्यान रखना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में जवाब देना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन इसके साथ में कानून बनाने की प्रक्रिया में हमारा योगदान महत्वपूर्ण और सटीक होना चाहिए।’’

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अमित शाह ने कहा कि एक नागरिक का देश के प्रति धर्म क्या होता है? एक सांसद का संसद के प्रति धर्म क्या होता है इसका बोध कराने के लिए ये धर्मचक्र प्रवर्तनाय का सूत्र यहां लिखा है। नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि धर्मचक्र प्रवर्तनाय का मतलब है कि भारत के शासक धर्म के रास्ते आगे बढ़े। धर्म का मतलब ‘रिलीजन’’ नहीं होता है बल्कि धर्म का मतलब ‘‘फर्ज’’ होता है, हमारा ‘‘दायित्व’’ होता है। उन्होंने कहा कि संसद के हर द्वार के ऊपर वेद, उपनिषद और सभी धर्म ग्रंथों से अच्छी बातें लिखी हैं और सभी सांसदों से अनुरोध है कि उन बातों को वे जरूर पढ़ें। 

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