IPL में इम्पैक्ट प्लेयर नहीं बनेंगे MS Dhoni, बद्रीनाथ ने बताया पूरा प्लान

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 03, 2026

नयी दिल्ली, तीन सितंबर पूर्व भारतीय कप्तान और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में नहीं खेलना चाहते हैं, जिससे 2027 में होने वाले टूर्नामेंट में उनकी भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता में एक और नया मोड़ आ गया है। सीएसके के पूर्व बल्लेबाज सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने यह खुलासा किया। यह अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज इम्पैक्ट प्लेयर नियम से अपना कार्यभार कम करके आईपीएल में अपना करियर आगे बढ़ा सकते थे लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर वह खेलना जारी रखते हैं तो वह पूर्णकालिक विकेटकीपर बने रहना चाहते हैं।

इसलिए वह इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में नहीं खेलेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि अगर वह इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खेलते हैं तो इससे सीएसके को रणनीतिक फायदा होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके लिए लंबे समय तक खेलना मुश्किल होगा जैसा कि (सीएसके के पूर्व मुख्य कोच स्टीफन) फ्लेमिंग ने भी कहा है। वे 16वें ओवर के बाद ही बल्लेबाजी करेंगे और विकेटकीपिंग करेंगे। जब उनकी भागीदारी इतनी कम है तो इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में खेलना उनके लिए आदर्श स्थिति होगी।’’ धोनी पिछले कुछ सत्र में फिटनेस संबंधी समस्याओं से जूझते रहे हैं और आईपीएल में उनके भविष्य को लेकर अटकलें जारी हैं।

बद्रीनाथ का मानना ​​है कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम धोनी पर काम का बोझ कम कर सकता है। इससे सीएसके उनके अनुभव और ‘फिनिशर’ के रूप में उनकी भूमिका का फायदा उठा सकता है। विकेटकीपर के रूप में खेलना जारी रखने की धोनी की प्राथमिकता का मतलब है कि सीएसके को अगले साल आईपीएल में उनकी भागीदारी पर फैसला करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

सीएसके को पांच आईपीएल खिताब दिलाने वाले धोनी ने 2024 के सत्र से पहले कप्तानी छोड़ दी और तब से बल्लेबाज के रूप में भी उनकी भूमिका सीमित हो गई है।

प्रमुख खबरें

Farrukhabad में Yogi Adityanath ने 1000 बाढ़ पीड़ित परिवारों को बांटी राहत सामग्री

Inox Wind को IOC से मिला 755 करोड़ रुपये का बड़ा Wind Energy प्रोजेक्ट

Satyendra Jain को ACB मामले में मिली बड़ी राहत, Delhi Court ने दी Bail

क्या है आर्टिकल 142 जिससे SC ने एक झटके में रद्द कर दीं छात्रों पर दर्ज FIR? अयोध्या केस में भी हुआ था इस्तेमाल