By अभिनय आकाश | Jul 28, 2026
पीओके यानी कि पाक अधिकृत कश्मीर से इस वक्त भयानक हिंसा की खबरें सामने आ रही है। जहां सड़कों पर अपना हक मांग रहे लोगों पर गोलियां बरसाई गई हैं। रावलाकोट की गलियां इस वक्त खून से लाल हो चुकी हैं। यह सब पाकिस्तानी सेना और वहां की सुरक्षा बलों के मासूमों पर चलाई गई गोलियों की वजह से है। जहां पर विरोध की आवाज को गोलियों से दबाने की पाकिस्तानी फौज कोशिश कर रही है। जिसकी वजह से पीओके में हालात विस्फोटक हो चुके हैं। दरअसल पीओके से सामने आ रही तस्वीरें और रिपोर्ट बेहद ज्यादा चिंताजनक है। रावलाकोट में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए मुनीर की सेना ने हिंसक रूप लिया है और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन के दौरान फायरिंग की है। जिसमें कई लोगों की जान चली गई है।
संगठन ने एक हस्तलिखित सूची भी जारी की जिसमें मृतकों का नाम है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन वहां से सामने आई तस्वीरें ऐसी ही कुछ कहानी को बयां कर रही हैं। बताया जा रहा है कि हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए हैं कि पीओके के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है। ताकि वहां के लोगों की जानकारी बाहर ना निकले और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क मुश्किल हो जाए। पीओके के लोगों का दर्द वो बता रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना ने उनके ऊपर दनादन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा दी और इसमें कितने सारे लोगों की जान चली गई। दरअसल ये पूरा विरोध प्रदर्शन एक या दो दिन नहीं बल्कि जून के महीने से चल रहा है। पीओके में लोग लगातार सड़कों पर उतरे हैं। धरने हो रहे हैं। बाजार बंद किए जा रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन ठप हो गया है और बड़े पैमाने पर आंदोलन चल रहा है और अब यह आंदोलन 50 दिनों से भी ज्यादा लंबा समय से चलता आ रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग यह साफ है कि वह स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था को खत्म करने के लिए स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधि देने के लिए मांग उठा रही है और गिरफ्तार किए हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की जा रही है। इसके साथ ही वहां पर बेहतर प्रशासन, सस्ती बिजली और आर्थिक सुधारों की मांग है। यानी कि एक जगह रहने वाले लोगों की जो सहूलियतें हैं उसकी ही मांग वो वहां के प्रशासन से कर रही है। लेकिन इसके खिलाफ भी वहां की प्रशासन गोलियां बरसा रही है।
इस बीच जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी और प्रशासन के बीच बातचीत भी हुई। लेकिन यह बातचीत बेनतीजा रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने ना तो गिरफ्तार लोगों को छोड़ने पर सहमति बनाई और ना ही उनकी प्रमुख मांगे मानी। बातचीत टूटने के बाद हजारों लोगों ने रावलकोट से मुजफराबाद की ओर मार्च निकाला। उधर हालात बिगड़ने के कारण और सुद्रनौती की विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को भी 10 अगस्त तक टाल दिया गया है। कई राजनीतिक दलों का कहना है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण चुनाव प्रचार बुरी तरीके से प्रभावित हो रहा है और लोगों की प्राथमिकता चुनाव नहीं बल्कि अपनी जान बचाना है।