नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से हो जाता है पापों का अंत

By विंध्यवासिनी सिंह | Jul 29, 2020

12 ज्योतिर्लिंगों में दसवां स्थान रखने वाले नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा अपरंपार है। कहा जाता है कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के सारे पाप और दुष्कर्म धुल जाते हैं तथा उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।

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आइये जानते हैं इस महान ज्योतिर्लिंग की महिमा...

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा 

पुराणों के अनुसार बताया जाता है कि गुजरात प्रांत में एक सुप्रिय नाम का वैश्य रहता था, जो भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। वह भोजन और जल ग्रहण करने से पूर्व तल्लीन होकर भगवान शिव की पूजा और अर्चना करता था। वहीं दारुक नाम का एक राक्षस सुप्रिय को बहुत तंग करता था और उसकी पूजा में हमेशा ही विघ्न उत्पन्न करता था। एक बार सुप्रिय को दारुक ने उसके मित्रों सहित पकड़कर कैद कर लिया। 

सुप्रिया उसके कैद में भी भगवान शिव की निरंतर पूजा अर्चना करते रहा। वहीं जब कैदी अवस्था में भी सुप्रिय द्वारा भगवान शिव की पूजा अर्चना की बात दारुक ने सुनी, तब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और वह सुप्रिय को खत्म करने के इरादे से उसके पास आया। 

दारूक को पास देख कर सुप्रिय डरा नहीं, लेकिन अपने मित्रों की चिंता उसे ज़रूर सताए जा रही थी। उसने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वह आकर उसके मित्रों की रक्षा करें। भगवान अपने भक्तों की बात को कैसे टालते?

ठीक तभी भगवन शिव वहां प्रकट हुए और सुप्रिय को पाशुपतास्त्र प्रदान कर दारुक राक्षस को खत्म करने को कहा। इस घटना के बाद सुप्रिय अपने जन्म जन्मांतर से मुक्त होकर भगवान शिव के धाम को चला गया और उस स्थान पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हो गई। 

कहां है मंदिर 

यह मंदिर गुजरात राज्य में स्थित है और गुजरात स्थित द्वारका धाम से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई है। कहा जाता है कि यह मंदिर ढाई हजार साल पुराना है। 

मंदिर की बनावट 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग खूबसूरत मंदिरों में से एक है और मंदिर परिसर के पास ही भगवान शिव की 80 फीट की ऊंचाई वाली मूर्ति स्थापित की गई है। यह मूर्ति पद्मासन मुद्रा में बैठे हुए शिव की है। इस मूर्ति के पास पक्षियों का झुंड हमेशा आपको घूमते हुए दिखाई देगा, जो इसकी प्राकृतिक खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देता है। सावन के महीने में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास काफी भीड़ रहती है, खासकर सावन के सोमवार को यहां भक्त भारी मात्रा में भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। वही मंदिर के गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग की बात करें तो यह ज्योतिर्लिंग सामान्य रूप से बने ज्योतिर्लिंगों से थोड़ा बड़ा है, और ज्योतिर्लिंग के ऊपर चांदी की परत चढ़ाई गई है।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के ऊपर एक चांदी का नाग भी बना हुआ है। 

इस मंदिर में पुरुषों का अभिषेक के लिए धोती पहन कर आना अनिवार्य है। अगर आपने नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लिए हैं तो दर्शन के उपरांत आपको ज्योतिर्लिंग के उत्पत्ति और इसकी महत्ता के संबंध में कथा जरूर सुननी चाहिए, तभी आप को दर्शन का संपूर्ण लाभ मिलता है।

- विंध्यवासिनी सिंह

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