Operation Sindoor 6 men | पहली बार सामने आए Op सिंदूर के शहीदों के नाम| Mathrubhumi

By अभिनय आकाश | Jul 21, 2026

ऑपरेशन सिंदूर में देश के लिए जान न्योछावर करने वाले जवान कौन थे? यह सवाल सरकार से कई बार पूछा गया मगर कोई सटीक जवाब नहीं मिला। हालांकि अब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए भारतीय आर्म्ड फोर्सेस के छह जवानों के नाम ऑफिशियली पब्लिक कर दिए गए हैं। इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर मेंशन किया गया है। इस वेबसाइट पर भारत के उन सभी शहीदों के नाम हैं जिन्होंने भारत के लिए किसी भी युद्ध या फिर ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। अब इसी वेबसाइट पर उन नामों को भी शामिल किया गया है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। इन शहीदों में भारतीय सेना के पांच जवान, सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफल मैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरली नायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन सभी नामों का जिक्र नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट के रोल ऑफ ऑनर सेक्शन में किया गया है। यहां कुल 26,626 शहीदों के नाम दिए गए हैं। इन शहीदों में 1947 से 48 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक में शामिल रहे सैनिकों के नाम शामिल हैं। अब इन शहीदों के नाम नई दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल की वॉर थ्री डी पर वर्ष 2025 के सेक्शन में भी लिखे जाएंगे। नेशनल वॉर मेमोरियल का त्यागचक्र यानी सर्कल ऑफ सैक्रिफाइस देश के शहीद जवानों को समर्पित है। इसमें ग्रेनाइट की 16 दीवारें हैं जिन पर आजादी के बाद देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सैनिकों के नाम रैंक और यूनिट लिखी गई हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह वीर जवानों के नाम भी हमेशा के लिए इस वॉर मेमोरियल का हिस्सा बन जाएंगे ताकि इनकी बहादुरी और कुर्बानी से आने वाली पीढ़ियों को हमेशा मोटिवेशन मिलती रहे। इन छह शहीदों में से दो को वीरता सम्मान भी मिल चुका है। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया। जबकि सार्जन सुरेंद्र कुमार को उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत वायुसेना मेडल मिला था। ऑपरेशन के दौरान राइफलमैन सुनील कुमार लाइन ऑफ कंट्रोल पर तैनात थे। 8 जून को हुए रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया।

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कब कब क्या हुआ

विपक्ष का कहना है कि संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी गई। वहीं रक्षा मंत्रालय का दावा है कि शहीद जवानों के सम्मान और जानकारी को लेकर किसी तरह की कोई बात छिपाई नहीं गई। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मंत्री राजनाथ सिंह के वीडियो को शेयर करते हुए अपने एक्स उस पर लिखा कि सिर्फ दो ही संभावनाएं हैं। या तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब संसद को संबोधित किया तो उनको यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्न चिन्ह है जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना या उससे भी अधिक गंभीर है क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में शपथ के साथ देश से झूठ बोलती है। पवन खेड़ा ने 28 जुलाई 2025 को संसद सत्र के दौरान लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण का एक छोटा सा क्लिप शेयर किया जिसमें रक्षा मंत्री ये कहते नजर आ रहे हैं कि आपको सवाल पूछना है तो यह पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है? तो उसका जवाब है नहीं। मैं विपक्ष के मैं विपक्ष के सम्मानित साथियों से कहना चाहता हूं कि आपको प्रश्न पूछना है तो यह प्रश्न पूछिए क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा? तो उसका उत्तर है हां।

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रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब

27 जून को रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर बयान जारी किया। मंत्रालय ने लिखा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के बलिदान की जानकारी पहली बार हाल ही में सार्वजनिक की गई। लेकिन यह दावा सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक इन छह जवानों को देश ने पहले ही श्रद्धांजलि दी थी। 11 मई 2025 को हुई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस समय के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस डीजीएमओ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनके बलिदान का जिक्र भी किया था। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को इन सभी वीर जवानों को वीरता पुरस्कार यानी कि गैलेंट्री अवार्ड्स दिए गए। इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज में भी सार्वजनिक की गई थी। सेना का कहना है कि यह उनके साहस और सर्वोच्च बलिदान का आधिकारिक राष्ट्रीय सम्मान था। बयान में यह भी कहा गया है कि भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी इन शहीदों को समय रहते श्रद्धांजलि दी गई थी। यानी ऐसा नहीं है कि उनके बलिदान को अब पहली बार सार्वजनिक किया गया है। देश लगातार इन वीर जवानों का सम्मान करता रहा है। नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों के नाम दर्ज करने पर मंत्रालय ने कहा कि शहीदों के नाम मेमोरियल पर लिखने की एक तय प्रक्रिया होती है और उसी के मुताबिक हर कदम उठाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पूरी सावधानी, सम्मान और नियमों का पालन किया जाता है। इसलिए यह कहना कि इस मामले में तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ पूरी तरह गलत है।

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