By एकता | Nov 06, 2026
भारत में हर साल 7 नवंबर को 'राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस' (National Cancer Awareness Day) मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि अगर कैंसर का समय पर पता चल जाए, तो इसका इलाज मुमकिन है और जिंदगी बचाई जा सकती है। देश में कैंसर के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए समय पर जांच और सही इलाज मिलना बेहद जरूरी हो गया है।
इस खास तारीख का कनेक्शन दुनिया की मशहूर वैज्ञानिक मैरी क्यूरी (Marie Curie) से है, जिनका जन्म 7 नवंबर 1867 को हुआ था। मैरी क्यूरी और उनके पति पियरे क्यूरी ने मिलकर रेडियम और पोलोनियम जैसे खास तत्वों की खोज की थी। उनके इसी रिसर्च ने आगे चलकर कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन थेरेपी की नींव रखी। भारत सरकार ने इस दिन की शुरुआत सितंबर 2014 में की थी, ताकि देशभर में लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक किया जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कैंसर एक बहुत बड़ा हेल्थ रिस्क बनता जा रहा है। साल 2024 में देश में करीब 16 लाख (1.6 मिलियन) नए कैंसर के केस सामने आए, जबकि लगभग 9 लाख लोगों ने इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा दी। हालात ऐसे ही रहे तो बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती उम्र की वजह से साल 2050 तक यह आंकड़ा हर साल 28 लाख नए मरीजों तक पहुंच सकता है।
चिंता की बात यह है कि हर 10 में से एक भारतीय को 75 साल की उम्र से पहले कैंसर होने का खतरा रहता है, और 100 में से लगभग 7 लोगों की मौत इस उम्र से पहले कैंसर से हो जाती है। पूरी दुनिया के कैंसर मामलों में से आधे से ज्यादा सिर्फ भारत और चीन में दर्ज किए जा रहे हैं।
ग्लोबोकैन (GLOBOCAN) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आगे है, जिसके 1,92,020 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। इसके बाद मुंह (ओरल कैविटी) का कैंसर दूसरे नंबर पर है, जिसके 1,43,759 नए केस दर्ज हुए हैं। वहीं महिलाओं में बच्चेदानी के मुंह का कैंसर यानी सर्वाइकल कैंसर के 1,27,526 मामले, फेफड़ों (लंग) के कैंसर के 81,748 मामले और खाने की नली (फूड पाइप) के कैंसर के 70,637 मामले देखे गए हैं।
महिलाओं में हर चार में से एक मामला ब्रेस्ट कैंसर का होता है, जबकि सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कारण है। वहीं पुरुषों में तंबाकू, सिगरेट और गुटखे की लत के चलते मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा फैल रहा है। इसके अलावा खराब खान-पान और एक्सरसाइज न करने की आदत की वजह से अब युवाओं में आंत (कोलोरेक्टल) का कैंसर भी तेजी से पैर पसार रहा है।