देश-दुनिया में स्थित मां दुर्गा के शक्तिपीठ, जानिए इनसे जुड़ा रोचक इतिहास

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 21, 2020

नवरात्रि की धूम इस समय पूरे देश में देखने को मिल रही है। देश में सभी जगह भक्त माता की पूजा-अर्चना में लगे हैं। नौ दिन चलने वाले नवरात्रि के इस पर्व में देश के सभी प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा के शक्तिपीठों पर लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दर्शन करने जाते हैं। देश और आस-पड़ोस के देशों में मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं। यहां दर्शन मात्र से ही लोगों के संकट दूर हो जाते हैं।

शास्त्रों में बताया जाता हैं कि ब्रह्मांड को शिव के महातांडव से ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने माता सती के शव को अपने चक्र से टुकड़ों में काट दिया। जहां-जहां माता सती के शरीर के टुकड़े वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ बने हैं। ये शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हैं। देवी पुराण में 51 शक्तिपीठ बताए गए हैं।

1. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ (गुह्येश्वरी शक्तिपीठ)

मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ नेपाल में स्थित हैं। पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ दुरी पर बागमती नदी के किनारे गुह्येश्वरी शक्तिपीठ स्थित हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता दोनों घुटने गिरे थे। इस मंदिर की सबसे रोचक बात हैं कि आज तक मंदिर में एक छिद्र से निरंतर पानी बहता रहता हैं। भारत से काफी संख्या में लोग मंदिर में माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।

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2. हिंगलाज माता (पाकिस्तान)

माता सती के 51 शक्तिपीठों में से कई शक्तिपीठ भारत के बाहर स्थित हैं। इसमें से एक शक्तिपीठ पाकिस्तान में स्थित है। ये शक्तिपीठ हैं हिंगलाज माता का। मान्यतानुसार हिंगलाज शक्तिपीठ पर ही माता सती का सिर गिरा था। यहां मुस्लिम लोग इस मंदिर की देखरेख करते हैं। भारत से कई लोग यहां दर्शन के लिए भी जाते हैं। लेकिन दोनों देशों के रिश्तों की वजह से काफी लोग यहां नहीं पहुंच पाते हैं। इस मंदिर की पाकिस्तान में भी काफी मान्यता हैं।

3. शंकरी देवी (श्रीलंका)

माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक श्रीलंका में स्थित हैं। इस शक्तिपीठ को शंकरी देवी मंदिर के नाम से जाना जाता हैं। यह मंदिर श्रीलंका के कोलंबो से लगभग 250 किमी दूर त्रिकोणमाली नामक स्थान पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के शरीर का उसंधि हिस्सा गिरा था। यही कारण है कि इस स्थान को शक्तिपीठ कहा जाता है। कहते हैं रावण सारी शक्तियां यहीं से प्राप्त करता था। यहां नवरात्रि में नवमी पर बड़े मेले का आयोजन होता हैं।

4. ज्वाला माता ( कांगड़ा)

कांगडा में स्थित ज्वाला देवी माता का मंदिर भी 51 शक्तिपीठ में से एक हैं। ज्वाला देवी मंदिर को जोता वाली का मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार इस स्थल पर माता सती की जीभ गिरी थी। इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति रूप में होते है। नवरात्रि में पूरे भारत वर्ष से श्रद्धालु यहां पर आकर देवी की कृपा प्राप्त करते है।

5. भवानीपुर शक्तिपीठ (बांग्लादेश)

माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक बांग्लादेश में भी स्थित हैं। बांग्लादेश के करतोया तट स्थान पर माता की पायल गिरी थी। यहां स्थानशेरपुर बागुरा स्टेशन से 28 किमी दूर भवानीपुर में स्थित हैं। भवानीपुर में शक्ति की 'अपर्णा' और कालभैरव की 'वामन' के रूप में उपासना की जाती है। बांग्लादेश में स्थित यह शक्तिपीठ हिंदुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ-स्थल है। यहां भी हर साल कई भक्त जाते हैं।

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