Chhattisgarh Police Explosives Recovered | छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के ठिकाने का भंडाफोड़, 65 बीजीएल सेल जब्त

By रेनू तिवारी | Feb 10, 2026

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सोमवार को एक विशेष अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के एक गुप्त ठिकाने का भंडाफोड़ किया और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के ठिकाने का भंडाफोड़ 

 नक्सलियों के एक ठिकाने का भंडाफोड़ कर वहां से 65 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) सेल बरामद किये गए। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद रायगुडेम गांव के पास के पहाड़ी जंगलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और स्थानीय पुलिस की एक टीम ने यह अभियान चलाया। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘ हमने 65 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) सेल और कमर पर बांधे जाने वाली दो थैली बरामद कीं।

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नक्सलियों की साजिश नाकाम

अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में बीजीएल सेल की बरामदगी से नक्सलियों की किसी बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। सुरक्षाबलों ने इलाके में चौकसी बढ़ा दी है और आस-पास के जंगलों में नक्सलियों की तलाश जारी है। 

वहीं इससे पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों को एक ऐतिहासिक रणनीतिक सफलता मिली है। सुकमा और बीजापुर जिलों में कुल 51 सक्रिय नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर सामूहिक रूप से ₹1.61 करोड़ का इनाम घोषित था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की समय-सीमा (Deadline) तय की है।

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मुख्य रणनीतिक मोड़: प्रभाकर राव का खात्मा

इस सामूहिक आत्मसमर्पण से ठीक एक दिन पहले, सुरक्षाबलों ने अबूझमाड़ के जंगलों में एक बड़ी मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली नेता एल. प्रभाकर राव को छह अन्य नक्सलियों के साथ ढेर कर दिया था। प्रभाकर राव एक खतरनाक 'एंबुश रणनीतिकार' माना जाता था। उसकी मौत ने नक्सलियों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है।

'पूना नर्कुम' और पुनर्वास का प्रभाव

बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 2,400 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि "पूना मारगेम" (नई राह) और "नियद नेल्लानार" (आपका अच्छा गांव) जैसी पहलों के माध्यम से सरकार अब सीधे उन इलाकों तक पहुँच रही है जहाँ कभी नक्सलियों का शासन था।

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