By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत कर्ज दावों के निपटान के लिए 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना को मंजूरी मिलने से कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत बकाया का नुकसान (हेयरकट) स्वीकार करना होगा। एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने न्यायाधिकरण के तीसरे सदस्य के रूप में मंगलवार को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत निपटान योजना को मंजूरी दी।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की अगुवाई वाले कर्जदाताओं के समूह ने योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताते हुए इसका विरोध किया था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा था कि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले योजना में कर्जदाताओं को केवल 6.25 करोड़ रुपये और प्रक्रिया लागत के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है। एनसीएलटी के आदेश के अनुसार, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का स्वीकृत दावा 1,322.39 करोड़ रुपये था, जबकि उसके लिए प्रस्तावित भुगतान केवल 38,09,294 रुपये था।
यह उसके स्वीकृत दावे का करीब 0.028 प्रतिशत ही था। आपत्ति करने वाले कर्जदाताओं ने यह भी कहा था कि पुनर्भुगतान योजना में 6.5 करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि को भी निश्चित नहीं, बल्कि संकेतात्मक बताया गया है। इसलिए यह योजना अस्थायी और गैर-निश्चित है तथा इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती।
हालांकि, एनसीएलटी ने कहा कि आपत्ति करने वाले कर्जदाताओं के पास कुल मिलाकर 20 प्रतिशत से कम मताधिकार ही था, जबकि योजना को 80.81 प्रतिशत मतों का समर्थन हासिल था। शर्मा ने 144 पृष्ठ के आदेश में कहा कि समाधान पेशेवर के आकलन के मुताबिक चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत प्रस्तावित राशि से भी काफी कम था। ऐसे में योजना को खारिज करने पर असहमत कर्जदाताओं को अधिक राशि मिलने की संभावना नहीं थी।
न्यायाधिकरण ने कहा कि योजना को मंजूरी मिलने से चंद्रा की वित्तीय स्थिति सुधरने और उनके मूल कर्जदाताओं से असहमत कर्जदाताओं को सीधे वसूली की बेहतर संभावना बन सकती है। एनसीएलटी ने यह भी कहा कि उसका काम कर्जदाताओं की व्यावसायिक समझ का स्थान लेना या समझौते की राशि के पर्याप्त होने का आकलन करना नहीं है। उसकी भूमिका निगरानी, सुधारात्मक और न्यायिक है।
न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि मंजूर होने के बाद यह योजना आईबीसी की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में। असहमत कर्जदाताओं को योजना से बाहर जाकर पूरे मूल कर्ज की वसूली की अनुमति देना कानून की व्यवस्था को कमजोर करेगा और कर्जदाताओं के बीच असमान व्यवहार को बढ़ावा देगा। एनसीएलटी ने समाधान पेशेवर को संबंधित कटौतियों के बाद कर्जदाताओं की संशोधित और अंतिम सूची तैयार कर रिकॉर्ड में रखने तथा मंजूर योजना की राशि के पुनर्वितरण के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा।
मामला अब बहुमत की राय के अनुरूप औपचारिक आदेश पारित करने के लिए मूल दो सदस्यीय पीठ के पास वापस जाएगा। यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत होगी।