महाराष्ट्र विधानसभा में शरिया कानून और बहुविवाह की वकालत करने वाली सना मलिक से कुछ सवाल

By नीरज कुमार दुबे | Jun 25, 2026

अगर भारत में रहकर किसी को पाकिस्तान का कानून, शरिया आधारित व्यवस्था या कुरान के नाम पर चलने वाला शासन इतना ही पसंद है, तो सबसे पहले उसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का लाभ उठाना बंद कर देना चाहिए और उसी देश में जाकर बस जाना चाहिए जिसकी व्यवस्था की वह इतनी खुलकर वकालत कर रहा है। भारतीय संविधान की शपथ लेकर चुनाव जीतना, विधायक बनकर लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचना और फिर उसी सदन में खड़े होकर पाकिस्तान जैसे देश के कानून की तारीफ करना केवल गैर जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि देश की संवैधानिक आत्मा का अपमान है। शर्मनाक बात यह है कि यह बयान किसी कट्टरपंथी संगठन के मंच से नहीं, बल्कि महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर भाजपा की सहयोगी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की विधायक सना मलिक ने दिया।

पूरा मामला भाजपा विधायक देवयानी फरांदे द्वारा नियम 105 के तहत प्रस्तुत ध्यानाकर्षण नोटिस से शुरू हुआ। उन्होंने सदन में कहा कि केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया, लेकिन महाराष्ट्र में उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं को आज भी बहुविवाह, घरेलू हिंसा और तलाक जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है। देवयानी फरांदे ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में तीन मुस्लिम महिलाएं सहायता के लिए उनके पास पहुंचीं। किसी महिला को अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई, तो किसी के पति ने उस पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर समान नागरिक संहिता कब लागू होगी और इसके लिए क्या विशेष कार्यबल बनाया जाएगा?

इसे भी पढ़ें: इमरजेंसी पर Sanjay Raut का BJP-Shinde गुट पर तीखा हमला, बोले- Indira Gandhi ने पार्टी नहीं तोड़ी थी

लेकिन मुस्लिम महिलाओं के दर्द और उनके अधिकारों की चर्चा के बीच सना मलिक ने जिस तरह पाकिस्तान और इस्लामिक कानून का समर्थन किया, उसने पूरे सदन का माहौल गरमा दिया। सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान ने कोई नया कानून नहीं बनाया, बल्कि कुरान में जो व्यवस्था दी गई है, उसका पालन किया है और भारत को भी पाकिस्तान की तरह कुरान के नियमों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बहुविवाह केवल मुस्लिम समाज में नहीं, बल्कि हर धर्म में होता है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह तक कह दिया कि मुसलमानों में बहुविवाह का तरीका सिखाया गया है और उसका पालन होना चाहिए, इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए।

देखा जाये तो यह बयान केवल राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को उजागर करता है जो भारत के संविधान से ऊपर मजहबी कानून को रखने की कोशिश करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक महिला विधायक होकर भी सना मलिक को उन हजारों, लाखों मुस्लिम महिलाओं का दर्द क्यों नहीं दिखाई देता जो बहुविवाह और तीन तलाक जैसी प्रथाओं की वजह से वर्षों तक प्रताड़ना झेलती रही हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं जहां कई पत्नियां रखने वाले पुरुषों पर महिलाओं के शोषण, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे। इसके बावजूद बहुविवाह को जायज ठहराना आखिर किस मानसिकता का परिचायक है?

उधर, सना मलिक के बयान पर प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने सना मलिक के बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि चर्चा का विषय तीन तलाक कानून का क्रियान्वयन है, पाकिस्तान या मजहबी परंपराएं नहीं। उन्होंने साफ कहा कि यह देश संविधान से चलता है, कुरान से नहीं। यहां पाकिस्तान और धार्मिक कानूनों की वकालत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भाजपा और शिवसेना के विधायकों ने भी सना मलिक के बयान का जोरदार विरोध किया।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि महायुति सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लागू समान नागरिक संहिता कानून में बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है और उल्लंघन करने वालों के लिए सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

उल्लेखनीय है कि सना मलिक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक की बेटी हैं। नवाब मलिक का नाम पहले भी गंभीर विवादों में आ चुका है। वर्ष 2022 में प्रवर्तन निदेशालय को उनके अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम गिरोह से संबंधों के सबूत मिलने का दावा किया गया था।

बहरहाल, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में बैठे बाकी दल केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण इस बयान पर चुप हैं? क्या संविधान की शपथ लेने वाले जनप्रतिनिधियों को खुलेआम पाकिस्तान और इस्लामिक कानून की पैरवी करने की छूट मिलनी चाहिए? यह केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा हुआ सवाल है।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

IPO Market में जबरदस्त हलचल: अगले हफ्ते 5 कंपनियां जुटाएंगी ₹7,443 करोड़, Investors के लिए बड़ा मौका

Maruti Suzuki का ₹35,000 करोड़ का Investment Plan: 5 साल में 63 लाख कारों की बिक्री का है महा-लक्ष्य

Galle Test से पहले Team India में बड़ा फेरबदल, Sai Sudharsan की जगह Sarfaraz Khan को मिली जिम्मेदारी

Shubman Gill फिट, Yashasvi Jaiswal का जलवा, Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया का दमदार प्रदर्शन