GST कर्ज का स्तर ‘उचित’ रखने की जरूरत, नहीं तो बढ़ेगा ब्याज का बोझ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 03, 2020

नयी दिल्ली।  वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि राज्यों के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व में कमी की भरपाई के लिए कर्ज की मात्रा इसके आर्थिक प्रभाव को देखते हुए ‘उचित’ रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र विपक्ष शासित राज्यों से प्रस्तावित ऋण योजना का विकल्प चुनने का आग्रह करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र राज्यों से यह ‘आश्वासन’ लेगा कि इस ऋण का भुगतान सिर्फ जीएसटी मुआवजा उपकर से किया जाएगा। भुगतान की सारिणी इस तरह से तय की जाएगी कि जून, 2022 के बाद उपकर पूल में संग्रह कर्ज के ब्याज के भुगतान के लिए पर्याप्त हो। अभी तक 21 राज्यों और तीन संघ शासित प्रदेशों नेराज्यों के माल एवं सेवा कर संग्रह में 1.83 लाख करोड़ रुपये की भरपाई के लिए केंद्र द्वारा प्रस्तावित ऋण योजना का विकल्प चुना है।

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वहीं अनुच्छेद 293 कहता है कि राज्य सरकारें सिर्फ आंतरिक स्रोतों से कर्ज जुटा सकती हैं। पांडेय ने कहा कि कर्ज का स्तर उचित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इसमें संतुलित रुख नहीं अपनाया जाता है, तो ब्याज का बोझ बढ़ेगा जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पांडेय ने कहा, ‘‘यही वजह है कि एफआरबीएम के तहत तीन प्रतिशत की सीमा तय की गई है। कुछ शर्तों के साथ इसे पांच प्रतिशत किया जा सकता है। यदि इन सीमाओं के पीछे कोई वजह नहीं होती, तो ये सीमाएं नहीं होतीं। चूंकि संविधान के तहत संतुलित रुख अपनाने की जरूरत है, इस वजह से वहां अनुच्छेद 292-293 हैं।’’ उन्होंने कहा कि पूरा मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन इस समय उसके एक हिस्से के बराबर कर्ज लिया जा सकता है। केंद्र ने रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई विशेष सुविधा के तहत बाजार से कर्ज लेकर 16 राज्यों और तीन संघ शासित प्रदेशों को दो किस्तों में 12,000 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

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