By रेनू तिवारी | Jul 23, 2026
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सियासी सरगर्मी और बढ़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बुधवार को स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा एक ज़रूरी शर्त है। उन्होंने कहा कि जब तक यह मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा। सौरव दास ने बताया कि दिन भर में उनकी प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से कई बार बातचीत हुई। दोनों इस बात पर पूरी तरह सहमत थे कि यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहना चाहिए। सोनम वांगचुक ने भी सभी प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक रूप से शांति बनाए रखने और सही व लोकतांत्रिक तरीक़े से अपनी बात रखने की अपील की है।
वांगचुक से बात हुई, विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए: सौरव दास
दास ने कहा, "आज मेरी सोनम वांगचुक से कई बार बात हुई। नतीजा यह निकला कि यह विरोध शांतिपूर्ण रहना चाहिए। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक रूप से शांति बनाए रखने और सही तरीके से विरोध करने की अपील भी की है।"
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पहले हुए विरोध प्रदर्शनों में सत्ताधारी सरकार द्वारा भेजे गए असामाजिक तत्व घुसपैठ करके पूरे विरोध को पटरी से उतार देते हैं, और अंत में शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने वालों को ही दोषी ठहराया जाता है; ऐसा नहीं होना चाहिए।
हमारे विरोध प्रदर्शन पर राजनीति करने के लिए JP नड्डा को शर्म आनी चाहिए: CJP
केंद्रीय मंत्री JP नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए दास ने कहा, "JP नड्डा को शर्म आनी चाहिए। लोग यहां 30 दिनों से ज़्यादा समय से बैठे हैं। राजनीति तो वही कर रहे हैं।"
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग पर दास ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा ज़रूरी है। इसके बिना विरोध जारी रहेगा। यह तब तक जारी रहेगा जब तक ज़रूरी होगा।"
JP नड्डा का कहना है कि पेपर लीक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP नड्डा ने बुधवार को कहा कि पेपर लीक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और यह एक गंभीर समस्या है जिस पर गहराई से चर्चा की ज़रूरत है। राज्यसभा में सदन के नेता नड्डा ने कहा कि सरकार संसद में NEET-UG पेपर लीक के सभी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए तैयार है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार "ज़िम्मेदार और संवेदनशील" है। उन्होंने पूछा "हमें आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर इस पर चर्चा करनी चाहिए। चर्चा के लिए सबसे अच्छा मंच संसद है और हम इस चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर विस्तार से और गहराई से चर्चा होनी चाहिए। पेपर लीक की वजहें क्या हैं? इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और केंद्र सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए हैं?"
"जब हमारे ध्यान में पेपर लीक का मामला आया तो हमने इसे कैसे संभाला और दूसरी सरकारों को इसे कैसे संभालना चाहिए? हमें किस बात पर गहराई से विचार करके समाधान निकालना चाहिए ताकि लाखों छात्रों के साथ अन्याय न हो?" उन्होंने आगे कहा।
ANI से मिली जानकारी के साथ