NEET Paper Leak: CBI ने महाराष्ट्र से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, पैसे के बदले किया था नंबर बढ़वाने का दावा

By रितिका कमठान | Jul 09, 2024

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सोमवार को नीट पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के लातूर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस व्यक्ति की पहचान नंजुने धप्पा के रूप में हुई है। इस पर आरोप है कि ये व्यक्ति छात्रों से पैसे लेकर उनके अंक बढ़ाने का दावा करता था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एनटीए से यह भी बताने को कहा कि उसने उन केंद्रों/शहरों की पहचान करने के लिए क्या कदम उठाए हैं जहां पेपर लीक हुए थे और लीक के लाभार्थियों की पहचान करने के लिए क्या तौर-तरीके अपनाए गए और लीक का प्रसार कैसे हुआ। यह कहते हुए कि नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक होने के तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता, पीठ ने कहा कि यह पता लगाना होगा कि क्या लीक की प्रकृति व्यापक थी या अलग-थलग थी, तभी दोबारा परीक्षा का आदेश देने पर निर्णय लिया जा सकता है।

 उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है।" यह एक स्वीकृत तथ्य है कि रिसाव है और रिसाव की प्रकृति कुछ ऐसी है जिसका हम पता लगा रहे हैं। यदि यह व्यापक नहीं है तो रद्दीकरण नहीं होगा। लेकिन दोबारा परीक्षा का आदेश देने से पहले हमें लीक की सीमा के बारे में सचेत होना चाहिए, क्योंकि हम 23 लाख छात्रों के मामले से निपट रहे हैं...", पीठ ने कहा।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "लीक की प्रकृति क्या है, लीक कैसे हुई, समय क्या था, लीक कैसे फैलाई गई, इस गड़बड़ी के लाभार्थी छात्रों की पहचान करने के लिए केंद्र और एनटीए ने क्या कार्रवाई की है।" सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि लीक सोशल मीडिया पर होती तो यह बहुत व्यापक हो जाती।

इसने परीक्षा एजेंसी एनटीए से पूछा कि प्रश्नपत्र लीक पहली बार कब हुआ, प्रश्नपत्र लीक होने का तरीका क्या था तथा लीक की घटना और 5 मई को परीक्षा के बीच कितना समय अंतराल था। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कथित पेपर लीक और अब तक प्रकाश में आई सामग्री के संबंध में अब तक की गई जांच पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि क्या कथित उल्लंघन प्रणालीगत स्तर पर हुआ है, क्या उल्लंघन ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता को प्रभावित किया है, और क्या धोखाधड़ी के लाभार्थियों को बेदाग छात्रों से अलग करना संभव है।

इसमें कहा गया है कि ऐसी स्थिति में जहां उल्लंघन से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है और लाभार्थियों को अन्य से अलग करना संभव नहीं होता, तो पुनः परीक्षण का आदेश देना आवश्यक हो सकता है। इसमें कहा गया है कि जहां उल्लंघन विशिष्ट केंद्रों तक ही सीमित है और गलत कार्य के लाभार्थियों की पहचान करना संभव है, वहां ऐसी परीक्षा को दोबारा कराने का आदेश देना उचित नहीं होगा, जो बड़े पैमाने पर आयोजित की गई हो।

शीर्ष अदालत ने सीबीआई को 10 जुलाई शाम पांच बजे तक स्थिति रिपोर्ट और केंद्र तथा एनटीए को सभी विवरणों के साथ अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी। शीर्ष अदालत नीट-यूजी 2024 के परिणाम वापस लेने और परीक्षा नए सिरे से आयोजित करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था।

अभ्यर्थियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था और प्रश्नपत्र लीक होने, अतिरिक्त अंक दिए जाने और नीट-यूजी के प्रश्नों में विसंगति का मुद्दा उठाया था। एनटीए द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष तथा अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश का मार्ग है। नीट-यूजी, 2024 का आयोजन 5 मई को 4,750 केंद्रों पर किया गया था और इसमें लगभग 24 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। 

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