नस्लवाद के खिलाफ लंबे समय तक जनांदोलन चलाने वाले नेता थे मंडेला

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 18, 2020

दक्षिण अफ्रीका के प्रसिद्ध अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला ने न केवल देश से नस्लवाद खत्म किया बल्कि गोरे शासन के दौरान दमन से गुजरे अश्वेतों के गुस्से की वजह से उस मौके पर वह हिंसा नहीं होने दी जिसकी आशंका जतायी जा रही थी। दक्षिण अफ्रीका में जब 1994 में नस्लवाद खत्म हुआ तब ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही थी व्यापक हिंसा होगी। दरअसल गोरे शासन में दमन की इंतहा हो गयी थी और ऐसा माना जा रहा था कि नस्लवाद के खात्मे के बाद श्वेतों के खिलाफ अश्वेत लोगों का गुस्सा फूट पड़ेगा एवं व्यापक हिंसा होगी लेकिन मंडेला ऐसे करिश्माई व्यक्ति थे कि हिंसा की एक भी घटना नहीं होने दी। दक्षिण अफ्रीका के मवेजो में 18 जुलाई, 1918 को जन्मे मंडेला ने यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ फोर्ट और यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटर्सरैंड से अपनी पढ़ाई की तथा 1942 में विधि स्नातक किया। वह अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) से जुड़े। उन्होंने 1944 में अन्य लोगों के साथ मिलकर अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग (एएनसीवाईएल) की स्थापना की। वर्ष 1948 में उन्हें एएनसीवाईएल का राष्ट्रीय सचिव चुना गया।

जेल के दौरान मंडेला की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी और उन्हें दक्षिण अफ्रीका का सबसे महत्वपूर्ण अश्वेत नेता माना जाने लगा। उन्होंने जेल से रिहाई के लिए अपनी राजनीतिक स्थिति से कोई समझौता करने से इंकार कर दिया। नस्लवाद के खिलाफ लंबे समय तक जनांदोलन चलने के बीच एएनसी ने सरकार से वार्ता शुरू की। उसी बीच 1990 में मंडेला को रिहा कर दिया गया। सन् 1993 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला। 27 अप्रैल को पूर्ण मताधिकार के साथ मतदान हुआ और एएनसी को बहुमत मिला। मंडेला 10 मई, 1994 को पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। वर्ष 1999 में एक कार्यकाल के बाद वह राष्ट्रपति की दौड़ से हट गए। वर्मा ने कहा कि उनके बारे में एक और अच्छी बात है कि उन्होंने स्वेच्छा से राष्ट्रपति पद छोड़ दिया। उनका कहना है कि मंडेला ने कम्युनिस्ट पार्टी और अफ्रीकन कांग्रेस पार्टी में तालमेल कायम रखा और जनतांत्रिक ताकतों का बिखराव नहीं होने दिया। हालांकि जनता का सपना जैसे भूमि पुनर्वितरण, बेरोजगारी उन्मूलन आदि पूरा नहीं हो सका और अपराध भी नहीं घटा।

इसे भी पढ़ें: युगों−युगों तक मानव जाति का मार्गदर्शन करते रहेंगे स्वामी विवेकानंद के विचार

उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शांति और आजादी की संस्कृति में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति के योगदान के सम्मान में 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला दिवस की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस दिवस पर अपने संदेश में कहा कि मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका के लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए अपने जीवन के 67 साल लगा दिये। वह राजनीतिक कैदी, शांति की स्थापना करने वाले तथा स्वतंत्रता सेनानी थे। मंडेला का निधन 95 वर्ष की उम्र में 5 दिसंबर, 2013 को हुआ था।

प्रमुख खबरें

Team India में अब चलेगी Gautam Gambhir की? Suryakumar Yadav की Captaincy पर लेंगे आखिरी फैसला!

TVK कैबिनेट में शामिल होने पर Thirumavalavan की सफाई, बोले- VCK कार्यकर्ताओं ने मुझे मजबूर किया

पाक आर्मी चीफ Asim Munir की तेहरान यात्रा सफल? USA को उम्मीद, Iran आज मान लेगा डील

Rajnath Singh का Shirdi से ऐलान: कोई ताकत नहीं रोक सकती, India बनेगा Top Arms Exporter