By Neha Mehta | Aug 28, 2026
नेपाल के नुवाकोट जिले का त्रिशूली बाजार बुधवार को कुछ ही मिनटों में एक व्यस्त कस्बे से तबाही के मंजर में बदल गया। सामने आए डरावने वीडियो में सड़क पर भागते लोग, रास्ता बदलने की कोशिश करती गाड़ियां और तेजी से बाजार की ओर बढ़ता मटमैला पानी दिखाई दे रहा है। पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और भारी मलबा भी बहता चला आया, जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
सैलाब का असर इतना तेज था कि देखते ही देखते त्रिशूली का बाजार क्षेत्र पानी, गाद, चट्टानों और मलबे के नीचे दबने लगा। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि पुल और दूसरी संरचनाएं भी तेज बहाव में बह गईं या बुरी तरह टूट गईं। कई हिस्सों में मोटी कीचड़ की परत जम गई, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।
त्रिशूली में हुई यह तबाही नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बुधवार को आई बड़ी प्राकृतिक आपदा का हिस्सा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ हिमालयी नदी तंत्र में उतर आया। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों और आसपास के गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया।
नुवाकोट जिले में हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। कई गांवों को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ जगहों पर घरों तथा दूसरी इमारतों के पूरी तरह तबाह होने की खबर है। बाढ़ के पानी में सड़कें और पुल बह जाने से कई समुदायों का संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया। इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। मलबे और कीचड़ के बीच फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल भारी मशीनों की मदद ले रहे हैं। टीमें उन जगहों पर लगातार काम कर रही हैं जहां लोगों के दबे होने या लापता होने की आशंका है। मुश्किल यह है कि कई इलाकों तक पहुंचने वाले रास्ते खुद बाढ़ में तबाह हो चुके हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, घायलों को इलाज उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाना है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि आपदा के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने के कारण अधिकारियों ने आगे भी बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है। त्रिशूली बाजार की तस्वीरें इसी खतरे की गंभीरता दिखाती हैं—जहां कुछ मिनट पहले तक रोजमर्रा की जिंदगी चल रही थी, वहीं अचानक पानी, पत्थर और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। नेपाल के प्रभावित पहाड़ी इलाकों में अब राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे और लापता लोगों तक पहुंचना है।