By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 28, 2026
नेपाल में बाढ़ के बाद बनी प्रतिकूल स्थिति का असर अब पर्यटन और सड़क संपर्क पर भी दिखने लगा है। काठमांडू, पोखरा, चितवन और नेपालगंज की यात्रा पर गए कई भारतीय पर्यटक बीच रास्ते से लौटकर महराजगंज जिले की सोनौली सीमा के रास्ते भारत वापस आ रहे हैं। सोनौली सीमा से लौटे पर्यटकों ने बताया कि नेपाल में कई जगहों पर उन्हें भारी जलभराव और बाढ़ का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति देखने के बाद परिवार ने यात्रा रद्द करने का फैसला किया। सुरक्षित भारत लौटने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली। परिवार के साथ काठमांडू जाने के लिए निकली मुंबई की मीना सतपाल को नारायण घाट के पास रोक दिया गया और सड़क पर ही लंबा समय गुजारना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण बिगड़ती स्थिति और सड़कों की खराब हालत की जानकारी मिलने के बाद यात्रा रद्द कर वापस लौटने का फैसला किया। इसी तरह, गोरखपुर निवासी रजनीश चितवन से काठमांडू जाने वाले थे, लेकिन बाढ़ की स्थिति बिगड़ने की जानकारी मिलने पर लौट आए। कई पर्यटकों ने बताया कि वे घंटों सड़कों पर फंसे रहे।
चिंता के मारे परिवार के सदस्यों के लगातार फोन आने के बाद उन्होंने यात्रा समाप्त करने का फैसला किया। सोनौली सीमा पहुंचने पर सभी ने राहत की सांस ली। बाढ़ की स्थिति ने नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों की चिंता बढ़ा दी है और पड़ोसी देश के पर्यटन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
इस बीच, चीन और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ में बृहस्पतिवार तक कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है और एक हजार से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है, जो ट्रैकिंग, पर्यटन या हिंदू तीर्थस्थलों की यात्रा पर नेपाल गए थे। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल के रसुवा और आस-पास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं।
इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं। इस बीच, नेपाल में सप्ताह की शुरुआत में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आए एक इलाके में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को जारी इस चेतावनी में अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।