नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं में बाढ़ से 933 कर्मी लापता, 600 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 01, 2026

जब बाढ़ निचले इलाकों में मौजूद सब कुछ अपनी चपेट में ले रही थी, तब शिव गिरि और छह अन्य लोग जान बचाने के लिए पहाड़ी पर ऊपर की ओर चढ़ने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे। रसुवा स्थित मैलुंग जलविद्युत परियोजना से ऊपर की ओर भागते हुए उन्होंने अपनी आंखों के सामने घरों, बस्तियों और इमारतों को पानी में बहते और गायब होते देखा। ‘नेपाल न्यूज’ वेबसाइट को दिए एक बयान में गिरी ने बताया कि उनके कई सहकर्मी और उनके एक रिश्तेदार बाढ़ में बह गए।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, 600 से अधिक लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। प्राधिकरण ने सोमवार को बताया कि अब तक सुरंगों से 279 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, फंसे हुए अन्य लोगों तक पहुंचने और उनकी तलाश के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टीम भी नेपाल के राहत अभियानों में शामिल हो गई हैं।

मैलुंग जलविद्युत परियोजना के तकनीकी कर्मचारी गिरि ने बताया कि अगले दिन उनका समूह पहाड़ी से नीचे परियोजना स्थल की ओर आया और वहां तैनात राहत कर्मियों को अपने फंसे होने की सूचना देकर मदद की गुहार लगाई। ‘नेपाल न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अंततः नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें वहां से निकालकर काठमांडू पहुंचाया, जहां त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में गिरी उपचाराधीन हैं। अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में कार्यरत सिविल इंजीनियर संदीप राणा लगभग 100 अन्य कर्मचारियों के साथ पहाड़ी पर चढ़कर बाढ़ के पानी से जान बचाने में सफल रहे।

राणा ने सोमवार को द राइजिंग नेपाल को बताया कि जब वे परियोजना कार्यालय में थे, तब आपातकालीन सायरन बजा। कर्मचारी अपने निर्धारित ‘असेम्बली पॉइंट’ पर पहुंच पाते, उससे पहले ही उन्हें सूचना मिली कि लगभग 12 किलोमीटर ऊपर बांध स्थल पर भीषण बाढ़ आ गई है। समूह ने ऊंचाई वाले इलाकों की ओर चढ़ना शुरू किया और अंततः त्रिशूली नदी से लगभग 30 से 35 मीटर ऊपर एक सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया।

वहां से उन्होंने परियोजना कार्यालय, शिविरों और सड़कों को जलमग्न होते देखा। राणा ने समाचार पत्र को बताया, हमें ऊपर से गिरते पत्थरों से बचते हुए लगातार ऊपर की ओर चढ़ना था। रुकने और सोचने तक का समय नहीं था।

यह समूह सात से आठ घंटे तक चढ़ाई करने के बाद शाम करीब चार बजे ग्रैंग इलाके में एक सड़क तक पहुंचा। राणा जब कालिकास्थान पहुंचे, तब तक उनके साथ केवल दो लोग ही बचे थे, जबकि बाकी लोग रास्ते में बिछड़ गए थे। जीवित बचे एक अन्य व्यक्ति की पहचान रामचंद्र के रूप में हुई है, जिन्होंने त्रिशूली नदी के किनारे बनी सुरंग के भीतर बाढ़ का सामना किया।

रतोपाटी समाचार पोर्टल के अनुसार, जब सुरंग में पानी घुसने लगा, तब रामचंद्र और उनके पांच सहकर्मी सुरंग के निकास द्वार से सैकड़ों मीटर दूर थे। खुद को बहने से बचाने के लिए उन्होंने सुरंग की छत पर लगी लोहे की सीढ़ी को पकड़ लिया। रामचंद्र ने बताया कि छह लोगों ने खुद को संभालने के लिए टीन की एक शीट का इस्तेमाल किया और लगभग छह घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी पर चढ़ते रहे।

उन्होंने बताया, हम छह लोग थे और बाद में हमें सुरंग के दरवाजे पर एक अन्य व्यक्ति भी मिला। नेपाल के जलविद्युत गलियारे में इस आपदा का भयावह रूप लगातार सामने आ रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या भूस्खलन के कारण आई अचानक बाढ़ ने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों व गांवों में तबाही मचा दी।

इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोग अब भी लापता हैं। हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी अपने साथ बाढ़ का पानी लेकर आई, जिससे मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा।

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