By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 12, 2026
(फाइल फोटो के साथ) काठमांडू, 12 अक्टूबर नेपाल में प्राधिकारी सोमवार को भी बाढ़ प्रभावित गोरखा जिले में लापता पांच लोगों की तलाश में जुटे रहे। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को अचानक आयी बाढ़ में मकान और पुल बह जाने के बाद 13 और लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। नेपाली सेना ने कहा कि चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक कुल 95 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
समाचार पत्र ‘द राइजिंग नेपाल’ की खबर के अनुसार, रविवार शाम तक एमआई-17 सहित चार हेलीकॉप्टरों और जमीनी बचाव दलों की मदद से 95 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें जगत से 17, यारू से 22, थुलोधुंगा से 13, दोभान से तीन, फिलिम से दो, न्याकफेदी से 17, पायू से 12, नामरुंग से तीन, देंग से तीन और धौली से तीन लोग शामिल हैं। रविवार को बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ की घटना 26 अगस्त को हुई भोटेकोशी आपदा के दो महीने से भी कम समय बाद हुई है।
उस आपदा में पानी और मलबे का अचानक तेज बहाव रसुवा और सिंधुपालचोक जिलों की बस्तियों में घुस गया था। इस घटना में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे। एक के बाद एक आयी इन आपदाओं ने हिमालयी नदियों के किनारे रहने वाले समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इन इलाकों में भूस्खलन के कारण नदियों और जलधाराओं का रास्ता अवरुद्ध हो सकता है, जिससे अस्थायी अवरोध बन जाते हैं। इनके टूटने पर पानी का विनाशकारी तेज बहाव आसपास के क्षेत्रों में तबाही मचा सकता है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि दो महिलाओं सहित पांच लोग अब भी लापता हैं।
प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन से दो झूला पुलों, वाहनों के आवागमन योग्य दो पुलों, तीन जलविद्युत परियोजनाओं और मवेशियों के 34 बाड़ों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, 45 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि 27 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण ने बताया कि तीन वाहन भी बाढ़ में बह गए।
अधिकारियों ने बचाव एवं राहत कार्यों के लिए 700 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। इनमें नेपाली सेना के 171 जवान शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में तंबू, कंबल, गद्दे, स्लीपिंग बैग और रसोई के सामान भी पहुंचाए गए हैं।
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत शृंखला हिमालय में मौसम की अनिश्चितता के कारण नेपाल में बाढ़ और हिमस्खलन का खतरा बना रहता है।