By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 04, 2026
नयी दिल्ली, चार सितंबर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान आसान बनाने के लिए, केंद्र सरकार भारत में उनके करीबी जैविक रिश्तेदारों की ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ के लिए केंद्रीय और राज्य-स्तरीय फोरेंसिक प्रयोगशाला की सुविधा उपलब्ध कराएगी। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत में रहने वाले प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदार-पिता, माता, बेटा, बेटी या भाई-बहन के जैविक नमूने एकत्र कर केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (सीएफएसएल), राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (एसएफएसएल), राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) की प्रयोगशालाओं और डीएनए जांच की सुविधा वाले एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में ‘डीएनए प्रोफाइल’ तैयार कराए जा सकते हैं। ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ किसी व्यक्ति की आनुवंशिक पहचान तय करने की एक वैज्ञानिक तकनीक है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि मंगलवार को काठमांडू में भारतीय दूतावास ने एक प्रेस बयान में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के पीड़ितों के शवों की पहचान की प्रक्रियाओं के बारे में उपलब्ध जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि में और पहचान की जारी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत में सीएफएसएल, एसएफएसएल और एनएफएसयू की प्रयोगशालाओं की सेवाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इनका इस्तेमाल ‘नेपाल में अचानक बाढ़ के बाद लापता लोगों के प्रथम श्रेणी के जैविक परिजनों की डीएनए प्रोफाइल तैयार करने’ के लिए किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने डीएनए जांच की सुविधा वाली सरकारी फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं की सूची भी साझा की है। मंत्रालय ने कहा कि नेपाल पुलिस की सलाह के अनुसार पहचान के लिए ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा सकती है। इसके लिए नेपाली अधिकारियों द्वारा बताई गई तकनीकी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
बयान में कहा गया कि ‘डीएनए प्रोफाइल’ तैयार होने के बाद उसे नेपाली अधिकारियों द्वारा मांगी गई प्रारंभिक जानकारी के साथ ईमेल करना होगा। इन प्रोफाइल का मिलान अज्ञात शवों से प्राप्त ‘डीएनए प्रोफाइल’ से किया जायेगा।