By अभिनय आकाश | Jul 22, 2026
विदेशी दूतों के साथ आमने-सामने की बैठक न करने के नियम का पालन अब तक करने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इस हफ़्ते अपना यह नियम तोड़कर भारत और चीन के दूतों से मुलाक़ात करने वाले हैं। शाह यह भी दिखाने की कोशिश करेंगे कि दोनों देश उनके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। शाह, ने PM के तौर पर अपने 100 दिनों के कार्यकाल में कम से कम दो बड़े विरोध-प्रदर्शन देखे हैं। एक मामला भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी लागू करने से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला तब भड़का जब पुलिस की कार्रवाई से परेशान होकर एक राइड-शेयर ड्राइवर ने खुद को आग लगा ली। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बालेन शाह इस हफ़्ते भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें करने वाले हैं। हालांकि अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जा रही इन बैठकों के, शाह के प्रशासन के 100 दिन पूरे होने के कुछ ही समय बाद होने की उम्मीद है।
बालेन शाह ने विदेशी दूतों के साथ आमने-सामने की बैठकें न करने का जो नियम खुद बनाया है, उसकी नेपाल में राजनयिकों, पूर्व अधिकारियों और टिप्पणीकारों ने लगातार आलोचना की है। जून की शुरुआत में वरिष्ठ पत्रकार केशव प्रधान ने 'इंडिया टुडे डिजिटल' को बताया था, "जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी मई में काठमांडू का दौरा करना चाहते थे, तो खबर है कि बालन शाह उनसे मिलना नहीं चाहते थे। उनका रुख यह था कि वह विदेश मंत्री के पद से नीचे के किसी भी व्यक्ति से नहीं मिलेंगे। इससे पहले, उन्होंने नेपाल में भारत के राजदूत से भी अलग से मुलाकात नहीं की थी, बल्कि केवल दूतों के एक समूह के हिस्से के तौर पर उनसे मिले थे। यह अभूतपूर्व है।