By अभिनय आकाश | Oct 30, 2026
वैश्विक अर्थशास्त्र की दुनिया में एक पुरानी कहावत है कि जो समंदर के रास्तों पर नियंत्रण रखता है वही दुनिया के व्यापार की दिशा तय करता है। लेकिन 21वीं सदी में इस कहावत में एक छोटा सा बदलाव आ चुका है। आज समंदर पर राज सिर्फ जहाजों का नहीं बल्कि उन लोहे के बक्सों का है जिन्हें हम शिपिंग कंटेनर कहते हैं। दुनिया का 90% से ज्यादा व्यापार समंदर के रास्ते होता है। आप जो कपड़े पहनते हैं, गाड़ियों के कलपुर्जे या कारखानों का कच्चा माल सब कुछ इन्हीं कंटेनरों में सफर करता है। लेकिन इस पूरी वैश्विक जीवन रेखा की सबसे कमजोर कड़ी क्या है? वो यह है कि पूरी दुनिया एक ही देश की मोहताज है और उसका नाम है चीन। दुनिया के 80 से 85 से 90% शिपिंग कंटेनरों का निर्माण अकेले चीन करता है। जब चीन चाहे कंटेनरों की कृत्रिम किल्लत पैदा हो सकती है। जब चीन चाहे माल भाड़ा आसमान छूने लगता है। लेकिन अब 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कमेटी ने इस एकाधिकार की रीड पर वार करने का फैसला किया है। योजना का नाम है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम यानी सीएमपीएस।
95% मैन्युफैक्चरिंग एक ही देश में होती है। इतना हैवी कंसंट्रेशन तो जितनी भी शिपिंग लाइंस, जितनी भी शिपिंग कंपनीज़ वो सब के सब रिक्वेस्ट करते हैं कि कोई तो दूसरा देश उभरे जो कंटेनर की मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पोजीशन बनाए। आज का जो स्कीम प्रधानमंत्री जी ने कैबिनेट में अप्रूव किया है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इस स्कीम में इस तरह के एलिमेंट्स हैं कि आने वाले समय में आने वाले कुछ वर्षों में कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग का भारत एक नया डेस्टिनेशन बनके उभरेगा। यह 13 इयर्स की स्कीम है। लॉन्ग टर्म स्कीम है। लॉन्ग टर्म इसलिए है कि मैन्युफैक्चरिंग में कोई भी चीज एकदम इमीडिएट रिजल्ट की नहीं होती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़ा पर्सेंस चाहिए होता है। बहुत ही केयरफुल एफर्ट चाहिए होता है। बहुत ही एक सस्टेंड वे में एक-एक स्टेप बाय स्टेप आगे जाना होता है। जैसे मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में आपने देखा ब्लूमबर्ग के लोगों को शायद समझ में नहीं आया कि अब हमने कंपोनेंट एक्सपोर्ट करने भी चालू कर दिए हैं। तो वैसे ही कंटेनर में भी स्टेप बाय स्टेप फाइनल प्रोडक्ट कंपोनेंट्स कंपोनेंट्स के आगे रॉ मटेरियल वो सारी मैन्युफैक्चरिंग भारत में करेंगे। टोटल स्कीम का लेआउट 10,000 करोड़ है और इसके चार कंपोनेंट्स हैं। सबसे पहला जो कैपिटल इन्वेस्टमेंट होगा उस पे जो इंटरेस्ट लगता है उस इंटरेस्ट के ऊपर सब्वेंशन 3% का सबवेंशन।